एशिया पैसेफिक क्षेत्र : जापान और चीन में भूकंप से धरती हिली, ऑफ्टरशॉक्स का खतरा बरकरार

इंटरनेशनल डेस्क। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मंगलवार को भूगर्भीय गतिविधियां अचानक तेज हो गईं, जब जापान और चीन में कुछ ही समय के अंतराल पर शक्तिशाली भूकंप दर्ज किए गए। इन झटकों ने दोनों देशों की आपदा प्रबंधन एजेंसियों को अलर्ट मोड पर ला दिया। यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) के अनुसार जापान के होनशू द्वीप के पूर्वी तट के पास 6.0 तीव्रता का भूकंप आया, जबकि चीन के किंगहाई प्रांत में 6.1 तीव्रता का झटका महसूस किया गया।
जापान के तटीय इलाकों में हिली इमारतें
जापान में भूकंप का केंद्र समुद्र के भीतर होनशू के पूर्वी तट के पास था। झटकों के कारण तटीय शहरों में बहुमंजिला इमारतें, कार्यालय और अन्य संरचनाएं कुछ समय तक हिलती रहीं। हालांकि राहत की बात यह रही कि भूकंप के बाद किसी बड़े सुनामी खतरे की चेतावनी जारी नहीं की गई। इससे समुद्री तटों के आसपास रहने वाले लाखों लोगों ने राहत महसूस की।
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रिंग ऑफ फायर में स्थित होने का असर
होनशू जापान का सबसे बड़ा और सबसे अधिक आबादी वाला द्वीप है, जहां राजधानी टोक्यो भी स्थित है। यह क्षेत्र प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ का हिस्सा माना जाता है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियां लगातार बनी रहती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत और यूरेशियन प्लेटों के बीच दबाव के कारण यहां समय-समय पर ऐसे झटके आते रहते हैं। भूकंपरोधी निर्माण तकनीकों के कारण फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
आफ्टरशॉक्स को लेकर चेतावनी
जापानी प्रशासन ने नागरिकों को अगले 48 घंटों तक सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्य भूकंप के बाद कई बार शक्तिशाली आफ्टरशॉक्स भी आ सकते हैं। एहतियात के तौर पर बुलेट ट्रेन नेटवर्क, बिजली आपूर्ति तंत्र और परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा जांच शुरू कर दी गई है। समुद्री गतिविधियों और जहाजों के संचालन पर भी कुछ समय के लिए असर पड़ा।
चीन के किंगहाई में दहशत का माहौल
जापान के बाद चीन के उत्तरी किंगहाई प्रांत में आए 6.1 तीव्रता के भूकंप ने स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी। भूकंप का केंद्र जमीन के भीतर लगभग 35 किलोमीटर की गहराई पर था। झटके महसूस होते ही लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और कई ग्रामीण इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रारंभिक रिपोर्टों में कुछ पुराने मकानों और दीवारों में दरारें आने की जानकारी सामने आई है।
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तिब्बती पठार के पास सक्रिय भूगर्भीय क्षेत्र
किंगहाई प्रांत तिब्बती पठार के निकट स्थित है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय टेक्टोनिक क्षेत्रों में गिना जाता है। भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के लगातार टकराव के कारण यहां भारी भूगर्भीय दबाव बनता रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही कारण है कि इस क्षेत्र में समय-समय पर मध्यम से लेकर बड़े भूकंप आते रहते हैं।
राहत-बचाव दलों की तैनाती तेज
चीनी प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव दल भेज दिए हैं। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका को देखते हुए सड़कों की निगरानी बढ़ा दी गई है। साथ ही टेंट, कंबल, चिकित्सा सामग्री और आपातकालीन सहायता उपकरणों का भंडारण किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
दोनों घटनाओं का सीधा संबंध नहीं
एक ही दिन में जापान और चीन में 6 से अधिक तीव्रता के भूकंप आना भूवैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय बन गया है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों घटनाओं का सीधे तौर पर एक-दूसरे से संबंध होना जरूरी नहीं है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का आकलन, संचार व्यवस्था बनाए रखना और संभावित आफ्टरशॉक्स के लिए लोगों को सतर्क रखना है। प्रशासन ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है।












