दूषित पानी का कहर: 36 मौतों के बाद भी नहीं जागा सिस्टम, भागीरथपुरा में फिर वही लापरवाही

दूषित पानी का कहर: 36 मौतों के बाद भी नहीं जागा सिस्टम, भागीरथपुरा में फिर वही लापरवाही
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में कभी दूषित पानी ने जो कहर बरपाया था, उसकी गूंज आज भी लोगों के जहन में ताजा है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 36 लोगों की मौत के बाद भी जिम्मेदार तंत्र ने कोई ठोस सबक नहीं लिया। हालात एक बार फिर उसी दिशा में बढ़ते नजर आ रहे हैं, जहां लापरवाही सीधे लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।

    दरअसल, इलाके में नर्मदा जल योजना के तहत नई पाइपलाइन डालने का काम तेजी से जारी है। शहर को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई इस परियोजना में अब गंभीर खामियां सामने आने लगी हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, पाइपलाइन बिछाने के दौरान जेसीबी मशीन से खुदाई करते वक्त पुरानी ड्रेनेज लाइन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इसके चलते सीवेज लाइन फूट गई और गंदा पानी सड़कों व आसपास के इलाकों में फैलने लगा।

    स्थिति तब और भयावह हो गई, जब इस दूषित माहौल के बीच ही पाइपलाइन डालने का काम जारी रखा गया। आरोप है कि ठेकेदार ने न तो काम रोका और न ही ड्रेनेज लाइन की तत्काल मरम्मत करवाई। नतीजतन, जहां एक ओर सीवेज का पानी खुले में बहता रहा, वहीं दूसरी ओर उसी के बीच नई पानी की लाइन डाली जाती रही।

    स्थानीय रहवासियों का कहना है कि कई जगहों पर नई पाइपलाइन के कनेक्शन भी दे दिए गए हैं, जिससे दूषित पानी सप्लाई होने का खतरा और बढ़ गया है। लोगों में डर है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो भागीरथपुरा एक बार फिर जलजनित बीमारियों की चपेट में आ सकता है।

    गौरतलब है कि इससे पहले भी इसी क्षेत्र में दूषित पानी की वजह से 36 लोगों की जान जा चुकी है। उस समय प्रशासन ने बड़े-बड़े दावे किए थे। जांच, सुधार और सख्त कार्रवाई के। लेकिन मौजूदा हालात उन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं।

    Hemant Nagle
    By Hemant Nagle

    हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...

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