ट्रंप का बड़ा ऐलान:बोले-ईरान से अब कोई डील नहीं होगी, समझौते का दौर खत्म

ट्रंप ने ईरान पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब किसी समझौते की जरूरत नहीं है और वह ईरानी नेतृत्व पर भरोसा नहीं करते। वहीं अमेरिकी सेना ने भी ईरान के कई सैन्य ठिकानों और समुद्री क्षमताओं पर कार्रवाई की पुष्टि की है। अमेरिका का दावा है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए की गई। इन घटनाओं के बाद पश्चिम एशिया में हालात फिर से तनावपूर्ण होते दिखाई दे रहे हैं।
'अमेरिका ईरान के साथ नहीं करेगा डील'
डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह ईरान के साथ किसी भी तरह की नई डील करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना था कि समझौते का समय अब बीत चुका है और इस मुद्दे को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि उन्हें वहां की सरकार पर कोई भरोसा नहीं है। उनके बयान से साफ संकेत मिला कि अमेरिका की नीति अब बातचीत की बजाय सख्ती की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान पर दिए कड़े बयान
नाटो प्रमुख मार्क रूट के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप से ईरान और हालिया घटनाक्रम को लेकर सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से समझौते का दौर समाप्त हो चुका है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को लेकर बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि वह ऐसे लोगों के साथ किसी तरह का लेन-देन नहीं करना चाहते। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
अमेरिकी हमलों का भी किया खुलकर जिक्र
ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खिलाफ हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के उन लोगों को निशाना बनाया जिन्हें वह बेहद खतरनाक मानता है। ट्रंप के मुताबिक कार्रवाई के बाद भी ईरान की ओर से जहाजों पर रॉकेट दागे गए, जिसके जवाब में अमेरिका ने दोबारा सख्त सैन्य कार्रवाई की। उनके बयान से साफ है कि वॉशिंगटन फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है।
'ईरान के साथ सीजफायर अब खत्म हो चुका है'
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क, तटीय रडार साइटों और एंटी-शिप मिसाइल क्षमताओं को निशाना बनाया। इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट के आसपास इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की 60 से ज्यादा छोटी नौकाओं पर भी हमला किया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की समुद्री हमले करने की क्षमता को कमजोर करना था ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग सुरक्षित रह सकें।
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हमलों की वजह भी अमेरिका ने बताई
अमेरिका के मुताबिक यह सैन्य कार्रवाई ईरान की उस कथित हरकत का जवाब थी, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया गया था। वॉशिंगटन का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा उसके लिए प्राथमिकता है और इसी कारण जवाबी कार्रवाई की गई। हालांकि ईरान की ओर से इन दावों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
नाटो, ग्रीनलैंड और स्पेन पर भी साधा निशाना
ईरान के अलावा ट्रंप ने नाटो, ग्रीनलैंड और स्पेन को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि नाटो में अमेरिका अपनी हिस्सेदारी से कहीं ज्यादा आर्थिक बोझ उठा रहा है। ग्रीनलैंड को उन्होंने अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम बताया। वहीं स्पेन को नाटो का कमजोर साझेदार बताते हुए उन्होंने यहां तक कह दिया कि वह स्पेन के साथ कारोबार नहीं करना चाहते और अमेरिकी वित्त मंत्री से व्यापारिक संबंध खत्म करने पर विचार करने को कहा है। ट्रंप के इन बयानों से साफ है कि उनकी विदेश नीति में टकराव का रुख लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है।












