अमेरिका में Tariff ड्रामा!कोर्ट से झटके के बाद ट्रंप का बड़ा एक्शन, सभी देशों पर लगाया 10% नया टैरिफ

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 3 घंटे बाद डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी दुनिया पर 10% ग्लोबल टैरिफ लागू कर दिया। नया टैरिफ ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत 150 दिनों के लिए प्रभावी रहेगा। फैसले से भारत-अमेरिका डील, वैश्विक व्यापार और बाजारों पर बड़ा असर पड़ेगा।
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कोर्ट से झटके के बाद ट्रंप का बड़ा एक्शन, सभी देशों पर लगाया 10% नया टैरिफ
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका में सत्ता, संविधान और न्यायपालिका के बीच टकराव अब खुली जंग में बदलता दिख रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके पुराने टैरिफ को अवैध घोषित किए जाने के महज तीन घंटे के भीतर पूरी दुनिया को चौंका देने वाला फैसला ले लिया। ओवल ऑफिस से नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए ट्रंप ने दुनियाभर के सभी देशों से होने वाले आयात पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। यह कदम न सिर्फ वैश्विक व्यापार को प्रभावित करेगा, बल्कि अमेरिका की संवैधानिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द किया ट्रंप का टैरिफ?

    शुक्रवार को US Supreme Court ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि, संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, यह अधिकार केवल अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के पास है।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि, ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत जो टैरिफ लगाए थे, वे कानून की सीमा से बाहर हैं। अदालत ने यह भी कहा कि, अमेरिका हर देश के साथ युद्ध या आपात स्थिति में नहीं है, इसलिए इस कानून का ऐसा इस्तेमाल उचित नहीं ठहराया जा सकता।

    फैसले के 3 घंटे बाद ट्रंप का जवाब

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज ट्रंप ने बिना समय गंवाए नया दांव चला। उन्होंने ओवल ऑफिस से ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत नया कार्यकारी आदेश साइन किया और इसकी जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दी।

    ट्रंप ने लिखा- मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि मैंने सभी देशों पर 10% वैश्विक टैरिफ लागू करने पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह लगभग तुरंत प्रभाव से लागू होगा।

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    सेक्शन 122 क्या है और क्यों अहम है?

    सेक्शन 122, ट्रेड एक्ट 1974 का हिस्सा है। इसके तहत अगर अमेरिका को अचानक व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो तो राष्ट्रपति, बिना लंबी जांच प्रक्रिया अस्थायी तौर पर 10% तक टैरिफ लगा सकता है।

    हालांकि, यह टैरिफ अधिकतम 150 दिनों तक ही लागू रह सकता है। इस दौरान सरकार हालात की समीक्षा करती है और आगे की रणनीति तय करती है।

    150 दिनों में क्या करेगा ट्रंप प्रशासन?

    व्हाइट हाउस के दस्तावेजों के मुताबिक, 150 दिनों में अलग-अलग देशों के खिलाफ व्यापार जांच होगी। यह तय किया जाएगा कि किस देश पर आगे कितनी दर से टैरिफ लगे। जरूरत पड़ी तो दरें बढ़ाई भी जा सकती हैं। ट्रंप ने साफ कहा कि, मैं इससे कहीं ज्यादा शुल्क भी लगा सकता हूं।

    कोर्ट और जजों पर ट्रंप का तीखा हमला

    ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बहुत निराशाजनक बताते हुए कहा कि, कुछ जज कट्टर वामपंथियों के पालतू हैं। वे देशभक्ति नहीं दिखा रहे, संविधान के प्रति वफादार नहीं हैं। वे सही फैसला लेने से डरते हैं।

    उन्होंने कहा कि, मुझे अदालत के कुछ लोगों पर शर्म आती है। उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है।

    असहमति जताने वाले जजों की तारीफ

    ट्रंप ने उन तीन कंजरवेटिव जजों की सराहना की, जिन्होंने फैसले से असहमति जताई-

    • सैमुअल एलिटो
    • क्लेरेंस थॉमस
    • ब्रेट कैवनॉ

    कैवनॉ ने अपने नोट में लिखा कि, टैरिफ नीति समझदारी भरी है या नहीं, यह अलग विषय है, लेकिन उनके मुताबिक यह कानूनी तौर पर वैध हो सकती थी। उन्होंने भारत द्वारा रूसी तेल खरीद पर लगाए गए टैरिफ का भी जिक्र किया और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया।

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्या असर?

    ट्रंप ने भारत को लेकर साफ कहा कि, भारत के साथ ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं होगा। पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि, भारत, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे देशों को अब पहले तय टैरिफ के बजाय सीधे 10% ग्लोबल टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।

    इसका सीधा मतलब यह है कि भारत पर लागू कुल टैरिफ 18% से घटकर 10% रह जाएगा, जो भारतीय निर्यातकों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।

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    दुनिया पर क्या पड़ेगा असर?

    इस फैसले के बाद कई देशों को अमेरिकी बाजार में टैरिफ राहत मिल सकती है।

    वैश्विक व्यापार में स्थिरता आ सकती है।

    शेयर बाजारों में तेजी की उम्मीद।

    कई उपभोक्ता वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं।

    कुछ उत्पादों को टैरिफ से छूट भी दी गई है, जैसे-

    • कुछ कृषि उत्पाद (बीफ, टमाटर, संतरा)
    • दवाइयां
    • महत्वपूर्ण खनिज
    • कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और पैसेंजर वाहन

    चीन पर सबसे ज्यादा दबाव

    चीन पहले से ही अमेरिकी टैरिफ का सबसे बड़ा शिकार रहा है। नए फैसले के बाद पहले से 25% टैरिफ, इसके ऊपर IEEPA के तहत 10% और अब नया 10% ग्लोबल टैरिफ। यानी चीन पर कुल 35% तक टैरिफ पहुंच सकता है।

    सेक्शन 301 और 232 भी तैयार

    ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि, सेक्शन 301 (अनुचित व्यापार प्रथाएं) और सेक्शन 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा) के तहत भी नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने कहा कि अधिकांश बड़े व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ नई जांच शुरू होगी।

    200 अरब डॉलर के टैरिफ रिफंड पर सस्पेंस

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले एक साल में अमेरिका ने 200 अरब डॉलर से ज्यादा टैरिफ वसूले। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि, क्या यह पैसा कंपनियों को लौटाना पड़ेगा?

    ट्रंप ने कहा कि, यह मामला अगले दो साल तक कोर्ट में ही चलेगा।

    आखिरी बार कब लगा था ग्लोबल टैरिफ

    इतिहास में आखिरी बार 1971 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने दुनिया पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया था। इसके बाद ही भविष्य के आर्थिक संकटों से निपटने के लिए ट्रेड एक्ट 1974 लाया गया।

    कोर्ट के फैसले से कौन से टैरिफ खत्म नहीं हुए?

    कोर्ट के आदेश से स्टील और एल्युमिनियम पर लगे टैरिफ खत्म नहीं हुए। रेसिप्रोकल टैरिफ और फेंटेनाइल से जुड़े 25% टैरिफ रद्द हो गए।

    यह भी पढ़ें: ‘PM मोदी महान व्यक्ति हैं लेकिन...’ टैरिफ पर कोर्ट के फैसले के बाद बोले ट्रंप, क्या भारत-US डील पर पड़ेगा असर?

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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