गाजा बोर्ड ऑफ पीस :ट्रंप की शांति पहल को 8 इस्लामिक देशों का समर्थन, क्या मिडिल ईस्ट में जंग थमेगी?

दोहा। गाजा में पिछले दो सालों से जारी भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। हजारों मासूम जानें गईं, लाखों लोग बेघर हुए और पूरा क्षेत्र मानवीय संकट की गिरफ्त में आ गया। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में युद्ध के बाद की व्यवस्था और शांति स्थापना के लिए एक नई पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) का ऐलान किया है। इस पहल को अब 8 प्रमुख इस्लामिक देशों का समर्थन मिल गया है, जिसे ट्रंप प्रशासन एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देख रहा है।
8 इस्लामिक देशों का समर्थन क्यों अहम?
कतर की राजधानी दोहा में हुई बैठक के बाद इन देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने पर सहमति जताई। समर्थन देने वाले देश-
- सऊदी अरब
- तुर्किये
- मिस्र
- जॉर्डन
- इंडोनेशिया
- पाकिस्तान
- कतर
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
बयान में कहा गया कि, सभी देश अपने-अपने कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत बोर्ड से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेंगे। खास बात यह है कि मिस्र, पाकिस्तान और UAE पहले ही औपचारिक रूप से बोर्ड में शामिल होने का ऐलान कर चुके हैं। क्षेत्रीय प्रभाव और राजनीतिक वजन को देखते हुए इन देशों का समर्थन गाजा में संघर्ष विराम और पुनर्निर्माण के लिए मजबूत आधार तैयार करता है।
क्या है गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस गाजा में सीजफायर के बाद की व्यवस्था को संभालने के लिए बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य है-
- गाजा में प्रशासनिक स्थिरता।
- पुनर्निर्माण की निगरानी।
- अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और निवेश।
- क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना।
ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के अनुरूप काम करेगा। ट्रंप खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं, जिससे यह साफ है कि व्हाइट हाउस इस परियोजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।
बोर्ड ऑफ पीस के प्रमुख सदस्य
इस बोर्ड में राजनीति, कूटनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े कई बड़े नाम शामिल किए गए हैं:
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नाम |
पद |
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डोनाल्ड ट्रंप |
अमेरिकी राष्ट्रपति, बोर्ड अध्यक्ष |
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मार्को रुबियो |
अमेरिकी विदेश मंत्री |
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स्टीव विटकॉफ |
अमेरिका के विशेष दूत |
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जैरेड कुश्नर |
ट्रंप के सलाहकार |
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टोनी ब्लेयर |
पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री |
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मार्क रोवन |
CEO, Apollo Global Management |
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अजय बंगा |
अध्यक्ष, वर्ल्ड बैंक |
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रॉबर्ट गेब्रियल |
अमेरिकी उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार |
इन सदस्यों को गाजा की स्थिरता, फंडिंग, निवेश और शासन से जुड़े अलग-अलग पोर्टफोलियो सौंपे जाएंगे।
गाजा पीस प्लान का दूसरा चरण
सीजफायर के बाद गाजा पीस प्लान अब दूसरे चरण में पहुंच चुका है। इसके तहत गाजा में प्रशासनिक व्यवस्था को संभालने के लिए नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) का गठन किया गया है। इस कमेटी का नेतृत्व डॉ. अली शा’थ करेंगे, जिन्हें एक अनुभवी टेक्नोक्रेट के रूप में जाना जाता है।
डॉ. अली शा’थ की प्रमुख जिम्मेदारियों में गाजा में पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं की बहाली, नागरिक संस्थाओं को मजबूत करना और युद्ध से प्रभावित रोजमर्रा की जिंदगी को धीरे-धीरे सामान्य बनाना शामिल है। इसके साथ ही एक अलग गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड का भी गठन किया गया है, जो बोर्ड ऑफ पीस के साथ मिलकर गाजा में स्थिरता और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
इजराइल की नाराजगी और आपत्ति
हालांकि, ट्रंप की इस पहल को इस्लामिक देशों का समर्थन मिला है, लेकिन इजराइल ने कड़ी नाराजगी जताई है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि, अमेरिका ने गाजा के नए प्रशासनिक बोर्ड की घोषणा बिना इजराइल से बातचीत किए की है, जो उसकी सरकारी नीति के खिलाफ है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल की सबसे बड़ी आपत्ति तुर्किये को बोर्ड में शामिल किए जाने पर है। इजराइल तुर्किये को हमास समर्थक मानता है और दोनों देशों के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं। इजराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने साफ कहा कि, गाजा को किसी बोर्ड की नहीं, बल्कि हमास के पूरी तरह खात्मे की जरूरत है।
$1 बिलियन सदस्यता फीस को लेकर विवाद
इस पहल से जुड़ा एक और विवाद तब सामने आया जब एक मीडिया हाउस ने रिपोर्ट किया कि, बोर्ड ऑफ पीस की स्थायी सदस्यता के लिए पहले साल $1 बिलियन की फीस तय की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जो देश पहले साल में तय रकम से ज्यादा फंड देगा, उसे स्थायी सदस्यता मिल सकती है।
हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट को गुमराह करने वाला बताया। उसका कहना है कि, बोर्ड में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम फीस नहीं है और स्थायी सदस्यता केवल उन देशों को दी जाएगी जो शांति और सुरक्षा के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता दिखाते हैं।
Trump Economic Development Plan क्या है?
गाजा बोर्ड ऑफ पीस के तहत ‘ट्रंप इकोनॉमिक डेवलपमेंट प्लान’ भी शामिल किया गया है। इस योजना के प्रमुख बिंदु हैं-
- गाजा में आधुनिक ‘मिरेकल सिटीज’ का विकास।
- स्पेशल इकोनॉमिक जोन का निर्माण।
- विदेशी निवेश आकर्षित करना।
- रोजगार के अवसर पैदा करना।
योजना में साफ कहा गया है कि, गाजा से किसी को जबरन नहीं निकाला जाएगा। जो लोग जाना चाहें, वे जा सकते हैं और लौटना चाहें तो उन्हें लौटने की पूरी आजादी होगी।
दो साल की गाजा जंग
गाजा में जारी युद्ध ने हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं:
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स्थिति |
आंकड़े |
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कुल मौतें |
66,000 |
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घायल |
1.7 लाख |
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आम नागरिकों की मौत |
83% |
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मारे गए बच्चे |
लगभग 20,000 |
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बेघर लोग |
19 लाख |
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अकाल का सामना |
22 लाख |
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क्षतिग्रस्त इमारतें |
78% |
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इजराइल का नियंत्रण |
75% क्षेत्र |
ये आंकड़े बताते हैं कि, गाजा को केवल युद्धविराम नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाली पुनर्निर्माण और शांति प्रक्रिया की जरूरत है।
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