आज के इस डिजीटल युग में हम पूरी तरह से ऑनलाइन मीडिया, गूगल पर निर्भर हैं। छोटी से छोटी जानकारी भी हमलोग गूगल पर सर्च कर पाने की कोशिश करते हैं। अब गूगल सिर्फ देश-दुनिया और शिक्षा की जानकारी का साधन भर नहीं रह गया बल्कि चलते-फिरते, उठते-बैठते हमारे मन में आने वाले छोटे से छोटे सवालों के जवाब हम गूगल सर्च की मदद से जानने की कोशिश करते हैं। राजनीति, लाइफ स्टाइल, रोजमर्रा की जरूरतों से संबंधित जानकारियां सबकुछ हमें एक ही प्लेटफॉर्म गूगल के पास मिल जाती हैं। लेकिन गूगल पर भी कुछ कंटेंट को लेकर सर्च न करने की मनाही है। देश और राज्य दोनों ही इस तरह के आपराधिक खोजों को ना करने का आदेश दे चुका है। आइए जानें कौन -कौन से हैं वे क्षेत्र जिनमें गूगल से जानकारी न निकालने का आदेश पहले ही प्रशासन द्वारा दिया जा चुका है। आइए जानें कौन-कौन से हैं वे साइट, जिनको गूगल पर सर्च करने की मनाही है।
गूगल पर हथियार बनाने की जानकारी इकट्टठा करना एक दंडनीय अपराध माना गया है। अगर आपने हथियार या बम बनाने से जुड़ी जानकारी गूगल के सर्च इंजन से लेनी चाही, तो ऐसे में आप साइबर क्राइम के गंभीर मामले में फंस सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति बम, बंदूक, विस्फोटक या किसी भी तरह के हथियार बनाने के तरीके खोजता है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरे की घंटी है। इसके कीवर्ड ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग सिस्टम की मदद से ट्रैक किए जा सकते हैं। बार-बार ऐसी सर्च करने पर पूछताछ, निगरानी या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। एक और साइबर क्राइम के तहत भारतीय कानून के अनुसार किसी भी गलत उद्देश्य से हथियार बनाने, रखने या उससे जुड़ी जानकारी जुटाने का प्रयास करना भी साइबर क्राइम की केटेगरी में आता है। ऐसे में पुलिस को अगर आपकी गलत पकड़ में आ जाती है, तो वह रातों -रात आपकी गिरफ्तारी कर सकते हैं।
साइबर अपराध से जुड़ी सारी जानकारी का पता लगाने के लिए गूगल के सर्च इंजन का इस्तेमाल भी क्राइम की कैटेगरी में आता है। कई लोग मजाक- मस्ती के मूड में गूगल के सर्च इंजन पर सोशल मीडिया अकाउंट कैसे हैक करें” या “पासवर्ड क्रैकिंग टूल” जैसी चीजें सर्च कर लेते हैं। लेकिन IT Act 2000 के तहत गलत एक्सेस, डेटा चोरी या सिस्टम में घुसपैठ भी अपराध है। भले ही इरादा सिर्फ साइबर क्राइम टूल सीख खुदको क्राइम से बचाने का हो, लेकिन ऐसे सर्च पैटर्न संदिग्ध माने जा सकते हैं। साथ ही ऐसे टूल्स खोजते समय डिवाइस में मैलवेयर या स्पायवेयर आने का भी खतरा रहता है।
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चाइल्ड पोनोग्राफी से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी को गूगल पर सर्च करना ऑनलाइन क्राइम की कैटेगरी में आता है। यह साइबर क्राइम से संबंधित तीसरा और सबसे गंभीर अपराध माना जाता है। चाइल्ड पोर्नोग्राफी या CSAM (Child Sexual Abuse Material) से जुड़ी सामग्री खोजना, देश में इसको लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाती है। IT Act और POCSO Act के तहत ऐसे कंटेंट को सर्च करना, देखना, डाउनलोड करना या शेयर करना सीधे तौर पर दंडनीय अपराध है। इसके क्राइम के लिए जेल, भारी जुर्माना और स्थायी आपराधिक रिकॉर्ड में आपका नाम तक दर्ज हो सकता है।
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नशीले पदार्थों, ड्रग्स, अवैध हथियार खरीद से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी को गूगल पर सर्च करना साइबर क्राइम का अहम हिस्सा है। लोगों की, की गई इन अपराधों पर Narcotics Control Bureau और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां लगातार नजर रखती हैं। अगर कोई व्यक्ति बार-बार ड्रग्स खरीदने के तरीके, ऑनलाइन सप्लायर या अवैध हथियारों की खरीद से जुड़ी जानकारी खोजता है, तो उसकी डिजिटल गतिविधियां ट्रैक कर पुलिस तुरंत गिरफ्तार कर सकती है।
फ्री नई मूवी को मुफ्त डाउनलोड करने के लिए जो सर्च किया जाता है वह बहुत आम लगता है। पर ऐसा नहीं पायरेसी के संबंध में जुर्माना और जेल दोनों हो सकते हैं। यह एक कानूनी आपराधिक मामला है। सुरक्षित और कानूनी तरीके से अगर नई फिल्में देखनी हो तो ओटीटी प्लेटफॉर्म सबसे बेस्ट है।
सीधे शब्दों में कहा जाए तो, इंटरनेट एक शक्तिशाली और उपयोगी साधन है, लेकिन साइबर क्राइम का हिस्सा बनने से बचें। कुछ ऐसी निषेध साम्रगियां हैं जिसे इंटरनेट पर सर्च करने पर भी कानूनी दंड का प्रावधान है। यह समझना बहुत जरूरी है कि हर सर्च प्राइवेट नहीं है। कई मामलों में डिजिटल सर्च संदेह होने पर जांच एजेंसियों द्वारा इन मामलों में निगरानी की जाती है। इसलिए ऑनलाइन रहते समय गैरकानूनी, सेंसेटिव टॉपिक्स को सर्च करने से बचें। कानूनी सीमा के अंदर ही सर्च ऑप्टेमाइजेशन करें। इससे आप साइबर क्राइम के अपराध से दूर रहेंगे।