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बिजनेस न्यूज:डिजिटल बैकिंग फ्रॉड में मिलेगा 25 हजार का मुआवजा, 5 दिन के अंदर दर्ज करानी होगी शिकायत

डिजिटल लेनदेन में बढ़ते फ्रॉड को देखते हुए आरबीआई ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत कम राशि के ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड का शिकार होने वाले लोगों को मुआवजा देने की व्यवस्था की जा सकती है। तय सीमा तक ग्राहक को नुकसान की राशि का बड़ा हिस्सा वापस मिल सकता है। इस कदम से आम लोगों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
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डिजिटल बैकिंग फ्रॉड में मिलेगा 25 हजार का मुआवजा, 5 दिन के अंदर दर्ज करानी होगी शिकायत
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    बिजनेस डेस्क। ऑनलाइन पेमेंट और डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फ्रॉड के मामले भी सामने आते रहते हैं। ऐसे में ग्राहकों को सुरक्षा देने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक अहम प्रस्ताव जारी किया है। इस प्रस्ताव के अनुसार छोटे डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के मामलों में पीड़ित को मुआवजा दिया जा सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक ग्राहक को नुकसान की राशि का करीब 85 प्रतिशत तक मुआवजा मिल सकता है, जिसकी अधिकतम सीमा पच्चीस हजार रुपये तय की गई है।

    आरबीआई ने जारी किया ड्राफ्ट प्रस्ताव

    केंद्रीय बैंक ने यह ड्राफ्ट प्रस्ताव 6 मार्च को जारी किया है। इससे पहले 6 फरवरी को आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति के दौरान इस दिशा में कदम उठाने का संकेत दिया था। अभी यह प्रस्ताव ड्राफ्ट के रूप में है और इस पर आम लोगों और संबंधित संस्थाओं से सुझाव मांगे गए हैं। लोग 6 अप्रैल 2026 तक इस पर अपनी राय दे सकते हैं। प्रस्ताव के अनुसार यह नियम 1 जुलाई 2026 या उसके बाद होने वाले डिजिटल ट्रांजेक्शन पर लागू किया जा सकता है।

    शिकायत जल्दी करना जरूरी

    डिजिटल फ्रॉड के मामले में पीड़ित को जल्द कार्रवाई करनी होगी। नियम के अनुसार फ्रॉड होने के पांच दिनों के अंदर बैंक में शिकायत दर्ज कराना जरूरी होगा। बैंक को एप्लीकेशन मिलने के बाद पांच दिनों के भीतर मुआवजा देने की प्रोसेस पूरी करनी होगी। इसके बाद बैंक आरबीआई से अपनी राशि वापस लेने के लिए दावा कर सकेगा। इस प्रस्ताव के साथ ग्राहक सुरक्षा नियमों में भी कुछ बदलाव करने की योजना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह खबर डिजिटल बैंकिंग करने वाले लाखों लोगों के लिए राहत भरी साबित हो सकती है। इससे ऑनलाइन लेनदेन में भरोसा बढ़ेगा और फ्रॉड के मामलों में ग्राहकों को आर्थिक नुकसान से कुछ हद तक सुरक्षा मिल सकेगी।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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