धुरंधर 2 पर उठे सवाल :असलम की पत्नी बोलीं- फिल्म में दिखाई गई कहानी वास्तविकता से अलग

फिल्म धुरंधर 2 इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर छाई हुई है, लेकिन इसी बीच फिल्म में दिखाए गए किरदार को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। पाकिस्तान के चर्चित पुलिस अधिकारी चौधरी असलम की पत्नी नूरीन ने फिल्म में उनके पति की छवि को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि फिल्म में असलम को जिस तरह पेश किया गया है, वह वास्तविकता से काफी अलग है। एक खास बातचीत में नूरीन ने न सिर्फ फिल्म पर अपनी राय रखी, बल्कि चौधरी असलम की जिंदगी, उनके ऑपरेशनों और उनकी मौत से जुड़े कई भावुक और चौंकाने वाले पहलुओं को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे एक फोन कॉल, कुछ आखिरी शब्द और फिर एक भयानक धमाके ने उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी।
फिल्म में दिखाया गया किरदार ‘अधूरा सच’
नूरीन के मुताबिक, फिल्म में चौधरी असलम को नेगेटिव तरीके से दिखाया गया है, जो हकीकत से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि असलम एक बहादुर और ईमानदार अधिकारी थे, जिन्होंने अपने करियर में कई बड़े ऑपरेशन किए, लेकिन कभी भी निर्दोष लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाया। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म बनाने से पहले परिवार या पुलिस अधिकारियों से कोई संपर्क नहीं किया गया, जिससे किरदार का संतुलित चित्रण सामने नहीं आ सका। हालांकि, उन्होंने अभिनेता के अभिनय की तारीफ करते हुए माना कि लुक और अंदाज काफी हद तक असलम जैसा था।
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“बुलेटप्रूफ जैकेट कभी नहीं पहनी”
नूरीन ने एक अहम खुलासा करते हुए बताया कि चौधरी असलम ने अपने पूरे करियर में कभी बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं पहनी। कई बार समझाने के बावजूद वह नहीं माने। उनका मानना था कि अगर मौत लिखी है तो कोई नहीं बचा सकता। यह बेखौफ रवैया ही उन्हें बाकी अधिकारियों से अलग बनाता था, लेकिन यही आदत उनके लिए खतरा भी बनी रही।
2011 का खौफनाक बम धमाका- जब बाल-बाल बचे
नूरीन ने 2011 में हुए एक बड़े हमले का जिक्र करते हुए बताया कि उनके घर को निशाना बनाकर विस्फोट किया गया था। उस समय घर में 350 किलो विस्फोटक से भरा बम फटा था, जिससे आसपास का इलाका हिल गया था। इस धमाके में कई लोगों की जान गई, लेकिन किस्मत से उनका परिवार बच गया। नूरीन के अनुसार, उस दिन उन्होंने घर के गेट और गाड़ियों की व्यवस्था बदल दी थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन ने ली थी।
मौत से पहले आखिरी बातचीत-भावुक कर देने वाला पल
चौधरी असलम की मौत की कहानी बेहद मार्मिक है। नूरीन के मुताबिक, घटना वाले दिन असलम घर से निकलने से पहले उनसे मिले और कहा कि मुझे माफ कर देना, मैं तुम्हें समय नहीं दे सका। इसके बाद जब वह रास्ते में थे, उन्होंने फोन कर कहा कि खुश रहना… खुदा हाफिज। यह उनके जीवन का आखिरी कॉल साबित हुआ। कुछ ही मिनटों बाद एक जोरदार धमाका हुआ। आत्मघाती हमले में विस्फोटकों से भरी कार उनकी गाड़ी से टकरा गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हमले की जिम्मेदारी और खतरे का अंदेशा
इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन ने ली थी। नूरीन ने बताया कि असलम को पहले से खतरे की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कभी पीछे हटना नहीं सीखा। वह लगातार आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाते रहे और कई बड़े नेटवर्क को तोड़ा, जिससे वे निशाने पर आ गए थे।
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डर शब्द उनकी डिक्शनरी में नहीं था
चौधरी असलम का नाम उन अधिकारियों में लिया जाता है, जो सबसे खतरनाक अपराधियों और आतंकियों से सीधे भिड़ते थे। नूरीन के मुताबिक, उन्होंने कभी किसी से डरना नहीं सीखा। चाहे वह बड़े गैंगस्टर हों या आतंकी संगठन, असलम हमेशा सामने से मुकाबला करते थे। यही वजह थी कि उनके ऊपर कई बार जानलेवा हमले हुए, लेकिन वह हर बार बच निकलते थे-जब तक कि 2014 का वह काला दिन नहीं आया।
परिवार के लिए भी सख्त, लेकिन सिखाया आत्मरक्षा
नूरीन ने यह भी बताया कि असलम ने उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी थी। उनका मानना था कि मुश्किल वक्त में खुद की रक्षा करना आना चाहिए। यह उनकी सोच और जीवनशैली को दर्शाता है, जहां खतरा हर पल मौजूद था और उससे निपटने के लिए तैयार रहना जरूरी था।












