दिल्ली:सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार का मास्टर प्लान, 1 नवंबर से बाहरी वाहनों की नो एंट्री

नई दिल्ली। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट वाले वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा। इसके साथ ही बाहरी राज्यों के कई वाहनों के प्रवेश, निर्माण कार्यों और कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर भी निर्धारित अवधि तक प्रतिबंध लागू रहेगा। प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर डिजिटल निगरानी और ड्रोन सर्विलांस की व्यवस्था की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बिना PUC सर्टिफिकेट के नहीं मिलेगा ईंधन
दिल्ली सरकार ने निर्णय लिया है कि राजधानी के सभी पेट्रोल और सीएनजी पंपों पर केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन मिलेगा, जिनके पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट होगा। इस नियम को पूरे वर्ष लागू रखा जाएगा। एएनपीआर कैमरों और डिजिटल डेटाबेस के माध्यम से वाहनों की निगरानी की जाएगी। बिना पीयूसी वाले वाहन मिलने पर संबंधित वाहन चालक के खिलाफ जुर्माने सहित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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बाहरी वाहनों की एंट्री और पार्किंग पर भी सख्ती
सरकार ने 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड बीएस-VI से नीचे के वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला किया है। हालांकि सीएनजी वाहन, इलेक्ट्रिक वाहन, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट रहेगी। इसी अवधि में 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना वसूला जाएगा। जबकि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के पार्किंग स्थलों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है, ताकि लोग मेट्रो का अधिक उपयोग करें।
50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम
सरकार के निर्देशों के अनुसार 1 नवंबर से 31 जनवरी तक सरकारी और निजी कार्यालयों में केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही कार्यालय में उपस्थित रह सकेंगे। बाकी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य रहेगा। निजी कंपनियों को कार-पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और अलग-अलग शिफ्ट लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक ज्यादा कंस्ट्रक्शन और तोड़फोड़ के कार्यों पर पूरी तरह रोक रहेगी।
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कंस्ट्रक्शन पर रहेगी पूरी तरह रोक
दिल्ली सरकार ने तीन हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली व्यावसायिक इमारतों, मॉल, होटल और कार्यालय भवनों में एंटी-स्मॉग गन, मिस्ट सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया है। सभी संस्थानों को 15 अगस्त तक यह व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इसके अलावा एक हजार वर्गमीटर से बड़े सभी निर्माण स्थलों पर भी मिस्ट सिस्टम लगाना जरूरी होगा। सरकार का उद्देश्य निर्माण गतिविधियों से निकलने वाली धूल और प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
खुले में आग जलाने पर होगी कड़ी निगरानी
सरकार ने आरडब्ल्यूए, हाउसिंग सोसाइटी, संस्थानों और सरकारी, निजी प्रतिष्ठानों को अपने परिसर में खुले में आग जलाने की घटनाएं रोकने की जिम्मेदारी सौंपी है। कूड़ा, पत्तियां, प्लास्टिक और बायोमास जलाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की निगरानी के लिए ड्रोन आधारित सर्विलांस किया जाएगा। विशेष रूप से रात के समय निगरानी को और अधिक सख्त रखा जाएगा।
नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत कार्रवाई की जाएगी। दोषियों पर जुर्माना, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति, परिसर सील करने से लेकर अभियोजन तक की कार्रवाई की जा सकती है। सरकार के अनुसार पिछले तीन वर्षों में नवंबर से फरवरी के बीच दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार 312 से 342 के बीच रहा है, जबकि अधिकतम AQI 461 से 494 तक पहुंचा। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार प्रदूषण नियंत्रण के लिए पहले से अधिक सख्त और स्थायी उपाय लागू किए जा रहे हैं।












