सोहागपुर। तामिया देलाबाड़ी के बाघ के शिकार के आरोपी से जुड़ा एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। छातीआम के जंगल में सरकारी जमीन पर कब्जा कर आरोपी द्वारा अफीम (डोडा) की अवैध खेती की जा रही थी। फॉरेस्ट टीम की कार्रवाई में इस पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ।संयुक्त अभियान में शामिल सोहागपुर-मटकुली के एसडीओ (एसटीआर) आशीष खोबरागड़े ने एक सवाल के जबाब में जानकारी देते हुए बताया कि फॉरेस्ट विभाग से सूचना मिलने के बाद तामिया पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की।
बताया गया है कि जंगल क्षेत्र से 6,148 अफीम के पौधे जब्त किए, जिनका कुल वजन 194.5 किलोग्राम है। जब्त फसल की अनुमानित कीमत 20 लाख रुपए से अधिक बताई जा रही है। आगे बताया गया है कि छातीआम निवासी उदे सिंह पहाड़ी नाले के पास सरकारी भूमि पर कब्जा कर लंबे समय से डोडा की खेती कर रहा था। यह फसल लगभग तैयार हो चुकी थी।

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सूचना मिलने के बाद रविवार सुबह पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर दबिश देकर पूरी खेती जब्त कर ली। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।
इस मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छिंदवाड़ा के पश्चिमी वन मंडल क्षेत्र में न केवल एक कालर आईडी लगे चार वर्षीय बाघ की हत्या हो गई, बल्कि उसी इलाके में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती भी चलती रही और किसी को भनक तक नहीं लगी।
स्थानीय स्तर पर इसे विभागीय लापरवाही या संभावित मिलीभगत से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, नर्मदापुरम और छिंदवाड़ा (तामिया) वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के चलते यह अवैध कारोबार सामने आ सका।
कुल मिलाकर एक ही आरोपी का बाघ शिकार और अफीम खेती जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होना न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि वन सुरक्षा तंत्र पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है और प्रशासन कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।