Naresh Bhagoria
15 Jan 2026
नई दिल्ली। दिसंबर 2025 में देश में बेरोजगारी दर में हल्की लेकिन अहम बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों के बीच बेरोजगारी दर बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई, जो नवंबर में 4.7 प्रतिशत थी। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के ताजा आंकड़े यह संकेत देते हैं कि श्रम बाजार में भागीदारी तो बढ़ रही है, लेकिन रोजगार सृजन की रफ्तार उसके अनुरूप नहीं दिख रही। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आंकड़ों को देखें तो तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है। ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर दिसंबर में 3.9 प्रतिशत पर स्थिर रही, यानी गांवों में रोजगार की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।
इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 6.5 फीसदी से बढ़कर 6.7 फीसदी हो गई, जो यह दिखाती है कि शहरों में नौकरी की तलाश करने वालों को ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। खास तौर पर शहरी युवाओं और संगठित क्षेत्र पर इसका असर ज्यादा देखा जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण पुरुषों में बेरोजगारी दर 4.1 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि शहरी महिलाओं के लिए थोड़ी राहत की खबर रही। शहरी महिलाओं में बेरोजगारी दर 9.3 प्रतिशत से घटकर 9.1 प्रतिशत पर आ गई। हालांकि, यह दर अब भी काफी ऊंची मानी जाती है। कामकाजी आबादी की हिस्सेदारी यानी वर्कर पॉपुलेशन रेशियो में भी मामूली सुधार दर्ज किया गया है। दिसंबर में यह अनुपात 53.2 प्रतिशत से बढ़कर 53.4 प्रतिशत हो गया, जो यह दिखाता है कि ज्यादा लोग काम कर रहे हैं या काम की तलाश में हैं।
श्रम बल भागीदारी दर भी दिसंबर में बढ़कर 56.1 प्रतिशत हो गई, जो नवंबर में 55.8 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में इसमें सुधार देखने को मिला, जबकि शहरी क्षेत्रों में इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई। महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर में भी सीमित बढ़ोतरी हुई है, खासकर ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 40.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। ये सभी आंकड़े करीब 3.7 लाख लोगों के सर्वेक्षण पर आधारित हैं और जनवरी 2025 से लागू नई गणना पद्धति के तहत जारी किए गए हैं। कुल मिलाकर, आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत में काम की तलाश करने वालों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में रोजगार सृजन अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।