Naresh Bhagoria
12 Jan 2026
Vijay S. Gaur
12 Jan 2026
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12 Jan 2026
Garima Vishwakarma
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जाम्बिया से आए मंदसौर के पंकज माहेश्वरी ने बताया कि पिछले 18 साल से जाम्बिया में रह रहा हूं। जाम्बिया क्यों गए, इस सवाल पर कहते हैं कि मैंने बेहतर अवसर मिलने की वजह से भारत छोड़ा। फिलहाल वहां पर शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं और चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर ऑफ टेक्सला अमेरिकन यूनिवर्सिटी में काम कर रहा हूं। पंकज बताते हैं कि जाम्बिया के लोग बॉलीवुड के दीवाने हैं। मोगैंबो खुश हुआ वाला डायलॉग वहां आज भी फेमस है। चूंकि जॉम्बिया में अंग्रेजी भाषा ही मुख्य तौर पर बोली जाती है तो वहां बॉलीवुड की मूवी अंग्रेजी में डब करके देखी जाती हैं। जाम्बिया का कल्चर इंडिया जैसा ही है। वहां भारतीयों का काफी सम्मान है। नाइजीरिया और घाना जैसे देशों में भी भारतीयों का उतना ही सम्मान है।
ऑस्ट्रेलिया से आईं भावना शिवानंद कर्नाटक मूल की निवासी हैं। वे 14 साल तक सिंगापुर में रहने के बाद पिछले 10 महीनों से ऑस्ट्रेलिया शिफ्ट हुई हैं। कहती हैं कि सिंगापुर में रहते हुए कभी नहीं लगा कि भारत से बहुत दूर हैं, क्योंकि हम सभी त्याेहार वहां भी मनाते हैं। सिंगापुर में दिवाली पर दो दिन की छुट्टी होती है। सरकार सजावट से लेकर इवेंट भी करवाती है। सरकार भी इन कार्यक्रमों में शामिल होती है। ऑस्ट्रेलिया के बारे में बताती हैं कि वहां भी विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस है। वहां सभी तरह की भारतीय एक्टिविटीज होेती हैं। भावना तीसरी बार प्रवासी भारतीय सम्मेलन में शामिल होने आई हैं। इससे पहले वे सिंगापुर और वाराणसी के प्रवासी भारतीय सम्मेलनों में शामिल हो चुकी हैं।
मूलरूप से चीन की रहने वाली 55 साल की सीता सिंगापुर से इस इवेंट में शामिल होने पहुंचीं हैं। कहती हैं मैंने भारत के बारे में बहुत निगेटिव चीजें सुन रखी थीं, लेकिन मोदीजी के आने के बाद बहुत बदलाव आए हैं। 7 बार भारत आ चुकीं सीता हिंदुत्व में विश्वास रखती हैं और भगवत गीता पढ़ती हैं। इसके लिए वह हफ्ते में एक बार एक घंटे का प्राइवेट ट्यूशन लेती हैं। उनके टीचर हिंदुस्तानी हैं जो उन्हें हिंदी के वाक्य पढ़ना और लिखना सिखाते हैं। पारंपरिक साड़ी और माथे पर कुमकुम लगाकर पहुंचीं सीता कहती हैं कि यहां आने के बाद दिखा कि यहां के लोग बहुत अच्छे हैं। पिछले 6 वर्षों से वह सनातन धर्म को मान रही हैं। कहती हैं कि यह साइंटिफिक और पूरी तरह से भारत का है। हम रोज चार बजे उठते हैं। स्नान करते हैं, जिससे शुद्धता आती है। मैं इसके बाद मंगला आरती में जाती हूं। सम्मेलन के बाद सीता वृंदावन जाएंगी।
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सुमंत कुमार राउत ओडिशा के मूल निवासी हैं, लेकिन 2013 से फिजी में रह रहे हैं। वहां प्रिंटिंग एंड पैकेजिंग का काम करते हैं। 8 लाख आबादी वाले फिजी में करीब 35 प्रतिशत भारतीय रहते हैं। सुमंत बताते हैं कि फिजी में गणेशोत्सव और दुर्गापूजा जैसे आयोजनों में हिंदुस्तानी अपना रिवाज नहीं भूले हैं। यहां तक कि नॉनवेज तक नहीं खाते हैं। शादियों की रस्में भी पूरी की जाती हैं। शादी से पहले तिलक होता है, शादी के बाद दुल्हन को मायके वाले फिर से वापस ले जाते हैं। होली-दिवाली में फिजी के नागरिकों को भी जोड़ा जाता है। सुमंत बताते हैं कि हमने जब वहां पहली बार होली का आयोजन किया तो करीब 2,000 लोग थे, जिनमें 500 फिजी निवासी थे। अब वे भी हमारे त्योहारों में रुचि लेने लगे हैं। हमें यह देखकर गर्व होता है।
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