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सीएम मोहन यादव का ऐलान:फूलों की खेती और मखाना उत्पादन पर जोर, उज्जैन में बनेगा फ्लोरीकल्चर सेंटर

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में मखाना उत्पादन बढ़ाने और उज्जैन में फ्लोरीकल्चर सेंटर स्थापित करने का ऐलान किया है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और फूलों व मखाना की खेती को नई दिशा देना है। राज्य के 14 जिलों में मखाना खेती का विस्तार किया जाएगा।
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फूलों की खेती और मखाना उत्पादन पर जोर, उज्जैन में बनेगा फ्लोरीकल्चर सेंटर

मध्यप्रदेश। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में किसानों की आय बढ़ाने और उद्यानिकी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने उज्जैन में सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर स्थापित करने की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य फूलों की खेती को बढ़ावा देना और किसानों को कम जमीन में ज्यादा मुनाफा दिलाना है। सरकार का फोकस अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक और लाभकारी खेती पर भी है।

उज्जैन में बनेगा फ्लोरीकल्चर सेंटर

मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन में फ्लोरीकल्चर सेंटर बनाया जाएगा, जहां फूलों की उन्नत खेती पर शोध और प्रशिक्षण होगा। इसके लिए लगभग 19 एकड़ जमीन चिन्हित कर ली गई है और प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। यह सेंटर सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है, जिससे उज्जैन को फूलों की खेती का बड़ा केंद्र बनाया जा सके।

किसानों की आय पर सरकार का फोकस

सीएम मोहन यादव ने कहा कि उद्यानिकी फसलें किसानों के लिए कम जमीन में ज्यादा कमाई का बेहतर साधन हैं। इसलिए ज्यादा से ज्यादा किसानों को इस क्षेत्र से जोड़ा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को जैविक खेती और प्राकृतिक खाद के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए ताकि खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सके।

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प्रदेश में कृषि क्षेत्र का तेजी से विस्तार

बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश में कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। मसाला फसलों के उत्पादन में प्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जबकि फल, सब्जी और फूलों के उत्पादन में भी मध्यप्रदेश की मजबूत स्थिति है। सरकार का लक्ष्य है कि इन क्षेत्रों में उत्पादन और बढ़ाया जाए और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए।

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मखाना उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

प्रदेश के 14 जिलों में मखाना उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें नर्मदापुरम, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, जबलपुर और अन्य जिले शामिल हैं। सरकार ने मखाना खेती का रकबा बढ़ाकर 85 हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 40 प्रतिशत तक अनुदान भी दिया जा रहा है।

हाईटेक बनेंगी नर्सरियां और सिंचाई व्यवस्था

प्रदेश की 40 सरकारी नर्सरियों को हाईटेक बनाया जा रहा है ताकि किसानों को बेहतर पौधे और तकनीक मिल सके। इसके साथ ही सूक्ष्म सिंचाई व्यवस्था का भी विस्तार किया जा रहा है, जिससे पानी की बचत हो और खेती अधिक प्रभावी हो सके। सरकार कृषि में आधुनिक तकनीक को तेजी से लागू कर रही है।

प्रदेश में लगेंगे कृषि महोत्सव

किसानों और उद्यानिकी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में अलग अलग महोत्सव भी आयोजित किए जाएंगे। इनमें आम महोत्सव, मिर्च महोत्सव, केला महोत्सव, सब्जी महोत्सव और अमरूद महोत्सव शामिल हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य किसानों को बाजार से जोड़ना और उनके उत्पादों को पहचान दिलाना है।

जैविक खेती और प्राकृतिक खेती

मुख्यमंत्री ने जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने कहा कि किसानों को रासायनिक खाद की जगह प्राकृतिक खाद अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। इससे न केवल जमीन की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि फसल भी ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक होगी।

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Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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