जबलपुर :अब स्वाद के साथ थाली में सजेंगे पोषक तत्वों से भरपूर 'काले आलू', कैंसर, शुगर और हार्ट की बीमारियों का जोखिम कम करेगी

हर्षित चौरसिया,जबलपुर। आलू का नाम सुनते ही दिमाग में सिर्फ कार्बोहाइड्रेट और मोटापा बढ़ने का ख्याल आता है तो अपनी सोच बदलने के लिए तैयार हो जाइए। कृषि वैज्ञानिकों ने अपनी तकनीक और अनुभव के आधार पर ‘काला आलू' की नई किस्म तैयार की है। आने वाले समय में यह काला आलू , न सिर्फ थाली का रंग और स्वाद बदलेगा, बल्कि पोषक तत्वों से भरपूर होने के चलते आलू पसंद लोगों में कैंसर, शुगर और हार्ट की बीमारियों का जोखिम कम करेगा। साथ ही किसानों को कम समय में अच्छा उत्पादन भी होगा। करीब 5 साल से काले आलू पर चल रहे अनुसंधान का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब सरकार इसे रिलीज करने को लेकर तैयारी कर रही है।
अखिल भारतीय समन्वित आलू परियोजना, छिंदवाड़ा की प्रभारी डॉ. शिखा शर्मा ने बताया कि केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (शिमला) के निर्देशन में अखिल भारतीय समन्वित आलू परियोजना, छिंदवाड़ा में इस उन्नत और अनोखी किस्म पर गहन शोध कार्य किया गया है। प्रायोगिक परिणामों में प्रयोग बेहद सफल रहने के बाद अब इस जैव-संवर्धित (बायो-फोर्टिफाइड) 'काले आलू' की मध्य प्रदेश के किसानों के लिए अनुशंसा की जा रही है। जल्द ही ये वैरायटी किसानों के लिए भारत सरकार द्वारा रिलीज कर दी जाएगी।
कैंसर, हार्ट और शुगर का जोखिम होगा कम
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस काले आलू (बेबी ट्यूबर) में सामान्य आलू के मुकाबले कई गुना ज्यादा एंटी-आॅक्सीडेंट और एंथोसाइएनिन हैं। ये तत्व शरीर में कैंसर कोशिकाओं को पनपने से रोकते हैं और रक्त धमनियों को ब्लॉक होने से बचाते हैं, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बेहद कम हो जाता है।
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इम्युनिटी का सुपर बूस्टर
वैज्ञानिकों के मुताबिक जैव-संवर्धित होने के कारण इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स सामान्य आलू से काफी भिन्न है, जिसके चलते यह मधुमेह से पीड़ित मरीजों के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित और गुणकारी है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना मजबूत कर देता है।
खास वैरायटी ' पोषक तत्वों से भरपूर है काला आलू
यह काला आलू (बेबी ट्यूबर) सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) और विटामिन सी से पूरी तरह समृद्ध है, जो मानव शरीर की दैनिक पोषण आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर सकता है।
बंपर पैदावार और कीट प्रतिरोधी
आलू की फसल लेने वाले किसानों के लिए यह वैरायटी वरदान साबित होगी। इसकी खासियत ये है कि यह वैरायटी न सिर्फ कम समय (90-100 दिन ) में तैयार होती है, बल्कि इसमें रोगों और कीटों से लड़ने की स्वाभाविक क्षमता है, जिससे किसानों की फसल सुरक्षित रहेगी।
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कोल्ड स्टोरेज की टेंशन होगी खत्म
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस जैव-संवर्धित काले आलू की भंडारण क्षमता लाजवाब है। इसे सामान्य तापमान पर भी लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे छोटे किसानों का कोल्ड स्टोरेज का भारी-भरकम खर्च बच जाएगा।
हर डिश बनेगी सुपरफूड
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह काला आलू खाने में बेहद लाजवाब और स्वादिष्ट है। न्यूट्रिशनिस्ट और डॉक्टरों की सलाह पर गृहणियां इसका उपयोग साधारण सब्जी और पराठे से लेकर पौष्टिक सलाद, रायता और यहाँ तक कि सेहतमंद हलवा बनाने में भी आसानी से कर सकती हैं।
शुरुआती प्रायोगिक रकबा: अखिल भारतीय समन्वित आलू परियोजना, छिंदवाड़ा के अनुसंधान केंद्रों में इस काले आलू का परीक्षण सीमित कृषि क्षेत्रों (प्रायोगिक प्लॉटों) में सफलतापूर्वक कर लिया गया है।
प्रति हेक्टेयर बंपर उत्पादन क्षमता: वैज्ञानिकों के अनुसार, व्यावसायिक स्तर पर आने के बाद यह उन्नत काली वैरायटी भी अन्य बायो-फोर्टिफाइड किस्मों की तरह प्रति हेक्टेयर 30 से 35 टन तक की बंपर पैदावार देने की क्षमता रखती है, जिससे कम जमीन में भी किसानों को भारी मुनाफा होगा। जबकि सामान्य तौर पर आलू का उत्पादन 25-28 टन प्रति हेक्टेयर होता है।











