मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ऐलान :जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर होगा, केंद्र को भेजेंगे प्रस्ताव

जबलपुर। वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर को कई महत्वपूर्ण सौगातें देने की घोषणा की। बरगी के नरई नाला स्थित रानी दुर्गावती के समाधि स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार वीरांगना की गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती केवल गोंडवाना साम्राज्य की शासक ही नहीं, बल्कि साहस, स्वाभिमान और मातृभूमि की रक्षा का प्रतीक हैं।
डुमना एयरपोर्ट को मिलेगा नया नाम
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे देशभर से आने वाले लोगों को रानी दुर्गावती के इतिहास और योगदान की जानकारी मिलेगी। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह द्वारा उठाई गई इस मांग पर मुख्यमंत्री ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि केंद्र से चर्चा कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके अलावा रानी दुर्गावती के जीवन के विविध पक्षों पर आधारित एक भव्य स्मारक 100 करोड़ रुपए की लागत से निर्माण किया जा रहा है।
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500 करोड़ की लागत से बनेगा अत्याधुनिक प्रोजेक्ट
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने जबलपुर के लिए एक और बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि रानी दुर्गावती के नाम पर लगभग 500 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक चिड़ियाघर और वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर विकसित किया जाएगा। यह परियोजना प्रदेश की प्रमुख पर्यटन और पर्यावरणीय योजनाओं में शामिल होगी। इससे वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों का विस्तार होगा।

पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि नए चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर के निर्माण से जबलपुर की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भेड़ाघाट, धुआंधार और अन्य पर्यटन स्थलों के साथ मिलकर जबलपुर को एक प्रमुख पर्यटन हब के रूप में स्थापित कर सकती है।
किसानों के लिए राहतभरी घोषणा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए फसल ऋण चुकाने के नियम में बदलाव की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब किसानों को हर साल 31 मार्च तक ऋण चुकाने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी। यह फैसला किसानों की व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिससे उन्हें वित्तीय दबाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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ऋण चुकाने की नई व्यवस्था होगी लागू
मुख्यमंत्री ने बताया कि किसान जिस तारीख को ऋण प्राप्त करेगा, अगले वर्ष उसी तारीख तक उसे ऋण जमा करने की सुविधा मिलेगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी किसान ने 30 जून को ऋण लिया है तो वह अगले वर्ष 30 जून तक राशि जमा कर सकेगा। इस नई व्यवस्था से किसानों को अपनी आय और फसल चक्र के अनुसार आर्थिक योजना बनाने में मदद मिलेगी तथा उनकी वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी।












