तेहरान। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ पाकिस्तान में प्रस्तावित सीजफायर वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि जब तक लेबनान में युद्धविराम लागू नहीं होता, तब तक वह किसी भी शांति वार्ता का हिस्सा नहीं बनेगा। ईरान ने पाकिस्तान पहुंचे अपने प्रतिनिधिमंडल की खबरों को भी झूठा करार दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और पाकिस्तान दोनों इस्लामाबाद में वार्ता के जरिए क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिश कर रहे थे।
ईरान के इस रुख से साफ है कि वह लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई को वार्ता से अलग मुद्दा मानने को तैयार नहीं है और पूरे क्षेत्रीय परिदृश्य को एक साथ जोड़कर देख रहा है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ईरान का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच चुका है, जिसमें संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हैं। कहा गया था कि यह प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ होने वाली बैठक में भाग लेने इस्लामाबाद पहुंचा है।
हालांकि, ईरान की सरकारी मीडिया फार्स न्यूज एजेंसी ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई यात्रा नहीं हुई है और ये खबरें गलत हैं। इससे संकेत मिलता है कि वार्ता को लेकर भ्रम और कूटनीतिक असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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प्रस्तावित अमेरिका-ईरान वार्ता में कई अहम और संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होनी थी। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे, हाई-लेवल यूरेनियम संवर्धन रोके और परमाणु सुविधियों को नियंत्रित करे। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण भी बड़ा मुद्दा है, जहां से दुनिया का बड़ा तेल-गैस व्यापार गुजरता है।
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अमेरिका इस समुद्री मार्ग को निर्बाध और सुरक्षित रखना चाहता है, जबकि ईरान इस पर अपना प्रभाव बनाए रखने की बात करता रहा है। बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और आर्थिक प्रतिबंध हटाने जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल थे।
उधर लेबनान में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष लगातार तेज हो रहा है। इजराइली सेना ने दावा किया है कि उसने पिछले एक सप्ताह में दक्षिणी लेबनान में 40 से ज्यादा हिजबुल्लाह लड़ाकों को मार गिराया और 50 से अधिक ठिकानों को तबाह किया। इजराइल ने यह भी आरोप लगाया कि हिजबुल्लाह एंबुलेंस और मेडिकल सुविधाओं का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए कर रहा है, हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया गया है। इसी तनाव के कारण ईरान ने साफ संकेत दिया है कि जब तक लेबनान में हालात सामान्य नहीं होते, वह अमेरिका के साथ बातचीत नहीं करेगा।
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ईरान के हालिया हमलों और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच संयुक्त अरब अमीरात ने भी अपने वैश्विक और क्षेत्रीय संबंधों की समीक्षा करने की बात कही है। UAE के कूटनीतिक सलाहकार अनवर गर्गश ने कहा कि उनका देश अब यह मूल्यांकन करेगा कि संकट के समय कौन-से देश वास्तव में भरोसेमंद साझेदार साबित होते हैं। इससे साफ है कि मध्य-पूर्व का यह तनाव अब व्यापक कूटनीतिक असर छोड़ रहा है और कई देश अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर रहे हैं।