Shivani Gupta
21 Jan 2026
Shivani Gupta
20 Jan 2026
Aakash Waghmare
20 Jan 2026
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अरावली पहाड़ियों में अवैध खनन के मामले पर सख्त बातें कही है। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट की रोक के बावजूद क्षेत्र में खनन जारी है, जिससे ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं जिन्हें बाद में सुधारा नहीं जा सकेगा। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि अरावली क्षेत्र में खनन रोकने के लिए विशेषज्ञों की एक एक्सपर्ट कमेटी गठित की जाएगी। साथ ही कोर्ट ने राजस्थान सरकार से यह गारंटी भी ली कि अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह का खनन नहीं होने दिया जाएगा।
सुनवाई की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) से कहा कि कोर्ट ने अपनी सुनवाई में गंभीर चिंता के बिंदु चिन्हित किए हैं, जिन पर केंद्र सरकार की सहायता आवश्यक है। CJI ने साफ तौर पर बताया कि यह मामला विरोधात्मक मुकदमा नहीं, बल्कि समस्या की जड़ तक पहुंचने की कोशिश है। इसी क्रम में अदालत ने एमिकस क्यूरी को इस विषय पर विस्तृत नोट दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जब तक आगे कोई आदेश पारित नहीं किया जाता, पहले से लागू व्यवस्थाएं और दिशा-निर्देश यथावत बने रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को जारी आदेश में 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों पर खनन की अनुमति दी थी। इस आदेश के बाद पूरे देश में 100 मीटर की परिभाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद कोर्ट ने 29 नवंबर को अपने ही आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी गठित करने के निर्देश देते हुए केंद्र सरकार और अरावली से जुड़े चार राज्यों जिनमें राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यह कोई प्रतिद्वंद्वी मुकदमा नहीं है, बल्कि अरावली पर्वतमाला का संरक्षण ही इसका उद्देश्य है। कोर्ट ने कहा कि 29 दिसंबर 2025 के आदेश में रेखांकित बिंदुओं को देखते हुए अरावली की परिभाषा से जुड़े वैज्ञानिक, पर्यावरणीय, भूवैज्ञानिक और कानूनी पहलुओं की दोबारा समीक्षा के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ निकाय की जरूरत पड़ सकती है।