Civil Services Day Special :मप्र के इकलौते आईएएस अफसर अशोक बर्णवाल जिन्होंने 4 मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया

भारत में सिविल सेवा दिवस (Civil Services Day) 21 अप्रैल को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने वाले सिविल सेवकों के समर्पण, कड़ी मेहनत और लोक प्रशासन में उनके योगदान को सम्मानित करना है। आज जानिए मप्र के ऐसे इकलौते अफसर अशोक बर्णवाल को जिन्होंने चार मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया।
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मप्र के इकलौते आईएएस अफसर अशोक बर्णवाल जिन्होंने 4 मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया

मनीष दीक्षित, भोपाल। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को सर्विस के दौरान लगातार ट्रांसफर-पोस्टिंग के बीच काम करना पड़ता है। ऐसे माहौल में एक IAS अधिकारी के नाम ऐसा रिकॉर्ड है, जो शायद ही टूटे। हम बात कर रहे हैं मप्र कैडर के 1991 बैच के अधिकारी अशोक बर्णवाल की। वह मप्र के एकमात्र आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने प्रदेश के चार मुख्यमंत्रियों के साथ उनके सचिवालय में काम किया। 

/img/89/1776700724015 उमा मुख्यमंत्री बनीं तब सीएम सचिवालय पहुंचे

मुख्यमंत्री सचिवालय में आमद हुई-दिग्विजय सिंह के 10 साल के शासन के बाद जब उमा भारती के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी, तब बर्णवाल की मुख्यमंत्री सचिवालय में आमद हुई। भारती की असमय विदाई के बाद बाबूलाल गौर के नेतृत्व वाली सरकार में भी वह सचिवालय में रहे। गौर के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ भी उन्होंने लंबे समय तक काम किया।

सत्ता परिवर्तन के दौरान भी सीएम सेक्रेटिएट में रहे

2018 में जब मप्र में सत्ता परिवर्तन हुआ और कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनी, उस दौरान भी वे मुख्यमंत्री सचिवालय में रहे। अलग-अलग स्वभाव के चार मुख्यमंत्रियों के करीबी रहने के बावजूद वे हमेशा लो प्रोफाइल रहे। बर्णवाल से यह जानने की कोशिश की कि उन्हें किस मुख्यमंत्री की क्या खूबी पसंद आई, तो उन्होंने कंडक्ट रूल्स का हवाला देकर इस विषय पर बात करने से मना कर दिया।

जिन सीएम के साथ काम किया, सबके अंदाज जुदा

उमा भारती :  बेबाक और त्वरित निर्णय करने वाली मुख्यमंत्री थीं। मप्र के लिए ऐसा कुछ करना चाहती थीं, जिससे लोग उन्हें याद रखें।  

बाबूलाल गौर : एक्सीडेंटल सीएम बने गौर का अंदाज काफी जुदा था। वह अधिकारियों से काम करवाने में माहिर थे। उनका फोकस नगरीय विकास रहा।

शिवराज सिंह चौहान : पांव-पांव वाले भैया की छवि को चरितार्थ कर प्रदेश को कई बार नाप लिया। पहले कार्यकाल में अधिकारियों पर निर्भरता अधिक थी। उनके लंबे कार्यकाल में कई लोकलुभावन योजनाएं प्रदेश को मिलीं।

कमलनाथ : इनकी पहचान एक विजनरी नेता के साथ मजबूत प्रशासकीय पकड़ वाले सीएम की रही। उनका अनुभव इतना था कि अधिकारी भी उनके निर्णय लेने की क्षमता के मुरीद थे। बड़े मसलों को आसानी से निपटाने में माहिर थे।

हमेशा से पावर सेंटर रहा है सीएम सचिवालय

मुख्यमंत्री सचिवालय हमेशा से पावर सेंटर रहा है। पूरे प्रशासन को दिशा-निर्देश देने के अलावा कोई कड़ा निर्णय हो या लोकलुभावन योजनाएं, बिना सचिवालय की सहमति से लागू नहीं होतीं। यहां काम करने वाले अधिकारी मुख्यमंत्री के आंख, कान के साथ कुछ हद तक दिमाग भी होते हैं, क्योंकि वे मुख्यमंत्री और पूरे प्रशासन के बीच सेतु का काम करते हैं।

सेवानिवृत आईएएस रजनीश के नाम भी रिकॉर्ड

1985 बैच के अधिकारी रजनीश वैश्य ने अपने सेवाकाल का लंबा समय एक ही विभाग में गुजारा। यह तब हुआ, जब प्रदेश में आईएएस अधिकारियों के लगातार तबादलों पर सवाल उठाए जा रहे थे। वैश्य के नाम जाने-अनजाने में एक ऐसा रिकॉर्ड है, जिसे तोड़ पाना मुश्किल दिख रहा है। दरअसल, वैश्य करीब 16 वर्षों तक नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में रहे। जाहिर है वे लगातार इस विभाग में नहीं रहे 1998 में पहली बार बतौर डायरेक्टर इस विभाग में आए और बाद में अपर मुख्यसचिव के पद पर पहुंचने के बाद बतौर उपाध्यक्ष भी यहीं रहे। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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