ईरान युद्ध पर जर्मनी का किनारा!चांसलर फ्रेडरिक मर्ज बोले- हम इस संघर्ष का हिस्सा नहीं बनेंगे

ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य संघर्ष से दूरी बनाने का संकेत दिया है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने साफ कहा है कि जर्मनी इस युद्ध का हिस्सा नहीं है और न ही वह इसमें शामिल होना चाहता है।
चांसलर फ्रेडरिक मर्ज बोले- हम इस संघर्ष का हिस्सा नहीं बनेंगे
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच जर्मनी ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य संघर्ष से दूरी बनाने का संकेत दिया है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने साफ कहा है कि जर्मनी इस युद्ध का हिस्सा नहीं है और न ही वह इसमें शामिल होना चाहता है।

    नॉर्वे दौरे के दौरान दिया बयान

    जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने यह बयान नॉर्वे के एंडेनेस शहर में अपने समकक्ष जोनास गहर स्टोर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया। उन्होंने कहा, “जर्मनी इस युद्ध का हिस्सा नहीं है और हम इसका हिस्सा बनना भी नहीं चाहते।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहे हैं और पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव तेजी से बढ़ रहा है।

    NATO देशों की भूमिका को लेकर बढ़ी चर्चा

    हाल ही में ईरान की ओर से NATO देशों फ्रांस, इटली और तुर्की के सैन्य ठिकानों पर हमले की खबरों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या NATO देश भी इस संघर्ष में शामिल हो सकते हैं। हालांकि जर्मनी ने अपने बयान से साफ कर दिया है कि वह इस युद्ध में शामिल होने के पक्ष में नहीं है।

    अमेरिका के फैसले की आलोचना

    जर्मन चांसलर ने इस दौरान अमेरिका के उस फैसले की भी आलोचना की, जिसमें समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद पर कुछ प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से ढील दी गई है। मर्ज ने कहा कि G7 समूह के छह सदस्य देशों ने इस फैसले पर असहमति जताई थी। उनके मुताबिक यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत संदेश देता है और इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है।

    ये भी पढ़ें: Trade Deal: भारत समेत 16 देशों के खिलाफ अमेरिका में जांच, ट्रेड डील पर असर की चर्चा; सरकार ने बताया अफवाह

    ऊर्जा संकट में कीमतें बनी बड़ी समस्या

    मर्ज ने कहा कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट में मुख्य समस्या आपूर्ति की कमी नहीं बल्कि बढ़ती कीमतें हैं। उन्होंने कहा कि तेल की उपलब्धता से ज्यादा चिंता उसकी कीमतों को लेकर है। गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका ने कुछ देशों को समुद्र में फंसे रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने के लिए सीमित समय की अनुमति दी है। यह फैसला उस समय लिया गया है जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी है।

    Dr. Sumit  Shrivastava
    By Dr. Sumit Shrivastava

    सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

    Latest Posts