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CG News :छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 52 नक्सलियों का सरेंडर, इन पर एक करोड़ 41 लाख रुपए का था इनाम

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 52 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 21 महिला और 31 पुरुष नक्सलवादी हैं। इन पर कुल 1 करोड़ 41 लाख रुपए का इनाम था। ये नक्सली आईडी ब्लास्ट, आगजनी जैसी घटनाओं में शामिल रहे।
छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 52 नक्सलियों का सरेंडर, इन पर एक करोड़ 41 लाख रुपए का था इनाम
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    बीजापुर। नक्सल विरोधी अभियान में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रामीण योजना ‘नियद नेल्लानार’ और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर एक डिवीसीएम समेत कुल 52 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। यह आत्मसमर्पण नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति बहाली की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    एक डिवीजनल कमेटी मेंबर भी शामिल

    आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में 21 महिला और 31 पुरुष नक्सली शामिल हैं। इनमें एक डिवीजनल कमेटी मेंबर (DVCM) भी शामिल है, जो संगठन के भीतर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहा था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी नक्सलियों पर कुल 1.41 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था।

    गंभीर नक्सली वारदातों में थे शामिल 

    पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी 52 माओवादी फायरिंग, आईईडी ब्लास्ट, आगजनी और अन्य हिंसक घटनाओं में शामिल रहे हैं। लंबे समय तक भूमिगत रहने के बाद इन नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।

    वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ सरेंडर

    सभी माओवादियों ने सीआरपीएफ और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में सरेंडर किया। इस दौरान सीआरपीएफ डीआईजी देवेन्द्र सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यूलेंडन यार्क, डीएसपी शरद जायसवाल, उप पुलिस अधीक्षक विनीत साहू समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। 

    दी गई आर्थिक सहायता

    पुनर्वास नीति के तहत पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले सभी 52 माओवादियों को 50-50 हजार रुपए की नगद सहायता राशि प्रदान की गई। अधिकारियों ने बताया कि आगे भी इन लोगों को सरकार की पुनर्वास योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा, ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें। 

    नक्सल संगठन की कमजोर हो रही पकड़

    पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार हो रहे आत्मसमर्पण नक्सल संगठन की कमजोर होती पकड़ का संकेत हैं। सरकार की योजनाओं और पुनर्वास नीति के चलते अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की उम्मीद मजबूत हो रही है। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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