CDS नियुक्ति पर पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे का बयान,बोले- योग्यता और अनुभव के आधार पर होता है चयन

नई दिल्ली। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे ने लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. सुब्रमणि का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में शीर्ष पदों पर नियुक्तियां किसी लोकप्रियता या सार्वजनिक बहस के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता, अनुभव और तय सैन्य प्रक्रिया के अनुसार की जाती हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में डीपी पांडे ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल रैंक तक पहुंचने वाले अधिकारियों का चयन कई स्तरों की जांच और मूल्यांकन के बाद होता है। उनके अनुसार, एन.एस. सुब्रमणि एक अनुभवी, पेशेवर और सक्षम अधिकारी हैं, जिनका चयन पूरी तरह संस्थागत प्रक्रिया के तहत हुआ है।
चयन प्रक्रिया पर रखी बात
डीपी पांडे ने कहा कि सेना में वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति को चुनाव या लोकप्रियता की प्रतियोगिता की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के नेतृत्व, सेवा रिकॉर्ड और रणनीतिक क्षमता को ध्यान में रखकर फैसले लिए जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया बेहद पारदर्शी है और इसे किसी चुनाव या लोकप्रियता प्रतियोगिता की तरह नहीं देखा जा सकता।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर फैसले जिम्मेदारी से होते हैं
पूर्व सैन्य अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले राजनीतिक नेतृत्व, नौकरशाही और सैन्य अधिकारियों के संयुक्त विचार-विमर्श के बाद लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर फैसले लेने वाले लोग नासमझ नहीं होते। उनके अनुसार, बाहरी विशेषज्ञ अपनी राय दे सकते हैं, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी निर्णय लेने वाली संस्थाओं की होती है।
सेना की भूमिका आज भी अहम
डीपी पांडे ने कहा कि आधुनिक युद्ध में वायुसेना, नौसेना और नई तकनीकों का महत्व बढ़ा है, लेकिन जमीनी सेना की भूमिका अब भी बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है। उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इजरायल और चीन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े सैन्य अभियानों में जमीनी बल निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
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एन.एस. सुब्रमणि के अनुभव का किया जिक्र
अपने बयान के अंत में डीपी पांडे ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. सुब्रमणि ने सियाचिन, जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और चीन सीमा जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में लंबी सेवा देकर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि सेना में एक सैनिक से जनरल बनने तक का सफर कठिन चयन प्रक्रिया और वर्षों की सेवा के बाद तय होता है, इसलिए ऐसे अधिकारियों के योगदान और नियुक्ति का सम्मान किया जाना चाहिए।











