अशोक गौतम, भोपाल। राजस्व अनुभाग अधिकारियों (SDM) ने कॉलोनाइजर्स से मिलकर 6 साल में भोपाल, इंदौर सहित 5 बड़े शहरों में विकास योजना के दायरे की कृषि भूमि में अवैध तरीके से परिवर्तित कर कॉलोनी की अनुमति दे दी। विकास योजना क्षेत्र में लैंड यूज परिवर्तन का अधिकार टीएनसीपी के अधिकारियों है।
कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि एसडीएम द्वारा 5 शहरों में वर्ष 2018 से 2023 के दौरान लैंड यूज परिवर्तन के 10 हजार से ज्यादा अनुमतियां दी गई थीं। कैग ने 535 मामलों की जांच की। इसमें पाया कि अनुविभागीय अधिकारियों ने 191 मामलों में 92.26 हेक्टेयर से ज्यादा लैंड यूज परिवर्तन की अनुमति जारी की। यह अनुमतियां भोपाल शहर के कोलार, ग्वालियर के झांसी रोड, मुरार, इंदौर के बिचौली हप्सी जैसे तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में की गई हैं। सर्वाधिक अनुमतियां भोपाल के कोलार क्षेत्र में दी गई हैं।
नहीं लिया सत्यापन पत्र नगरीय निकायों ने वर्ष 2018 से 2021 तक पांचों नगर पालिकाओं ने 33 हजार भवन अनुज्ञा जारी की थी। कैग ने पाया कि अधिकारियों ने बिना जांच पड़ताल के बिना सत्यापन के भवनों के पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिए। इसके लिए निकायों को आईटी एप्लिकेशन बनाना था, लेकिन निकायों ने यह भी नहीं बनाया।
सरकार ने स्वीकार किया है कि अधिकारियों ने अनुमतियां गलत तरीके से जारी की है। विकास क्षेत्र में लैंड यूज परिवर्तन का अधिकार अनुविभागीय अधिकारियों को नहीं है।
निकायों ने कॉलोनाइजर्स से मिलकर 96.78 लाख रुपए का चूना लगाया है। कॉलोनाइजर से निकाय कॉलोनी विकास की 2 फीसदी राशि पर्यवक्षण शुल्क के रूप में रखी जाती है। इस पर 18 प्रतिशत राशि जीएसटी होता है।। कैग ने जांच में पाया कि 148 प्रकरणों में भोपाल नगर निगम को छोड़कर ग्वालियर, इंदौर जबलपुर और उज्जैन नगर निगम के 122 प्रकरणों में कॉलोनाइजर्स और विकासकर्ताओं से पर्यवेक्षण शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी नहीं लिया गया। इनमें 539.69 लाख रु. शुल्क एकत्र किया था, जिसमें 96.78 लाख रुपए जीएसटी होता है।