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Crude Oil Price:ट्रंप की धमकी का असर, ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर पार, WTI में भी तेज उछाल

डोनाल्ड ट्रंप की हालिया धमकी और ईरान के सख्त जवाब के बाद वैश्विक तेल बाजार में जोरदार हलचल देखने को मिली है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा।
ट्रंप की धमकी का असर, ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर पार, WTI में भी तेज उछाल
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दुनियाभर के ऊर्जा बाजार में एक बार फिर अस्थिरता का दौर लौट आया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से ऊपर धकेल दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी और तेहरान द्वारा होर्मुज को बंद करने की धमकी के बाद वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई है।

सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं, जिससे निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों में चिंता का माहौल बन गया। भारत जैसे देशों में इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, ट्रांसपोर्ट खर्च और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

ब्रेंट और WTI में आया तेज उछाल

तेल वायदा बाजार में तुरंत असर देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में तेजी दर्ज की गई और यह 81.66 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा, जिसमें लगभग 1.35% की बढ़त दर्ज की गई। दिन के कारोबार (इंट्राडे) में कीमतें और भी ऊपर चली गईं और 82.30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। यह स्तर पिछले कुछ दिनों की तुलना में काफी ऊंचा माना जा रहा है।

वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी क्रूड WTI भी पीछे नहीं रहा और यह बढ़कर 77.38 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह उछाल सिर्फ सप्लाई-डिमांड का नहीं बल्कि भू-राजनीतिक तनाव का सीधा परिणाम है।

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शांति वार्ता में दिखा ट्रंप का सख्त रुख

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता पहले से ही नाजुक स्थिति में थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ट्रंप ने साफ कहा कि अगर ईरान के साथ कोई ठोस और भरोसेमंद समझौता नहीं होता, तो अमेरिका सैन्य विकल्पों पर दोबारा विचार कर सकता है। उनके इस बयान ने वैश्विक बाजारों में तुरंत अस्थिरता पैदा कर दी।

दुनिया की तेल सप्लाई पर खतरा

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होकर गुजरती है।

ईरान द्वारा इस रणनीतिक मार्ग को बंद करने की धमकी ने बाजार को और अधिक अस्थिर कर दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह मार्ग बाधित होता है तो वैश्विक तेल सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है और कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। यह स्थिति केवल तेल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और आम उपभोक्ता कीमतों पर भी दिखेगा।

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शांति वार्ता में दरार

हाल ही में अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच शांति वार्ता की कोशिशें शुरू हुई थीं। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम तब देखने को मिला जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरानी अधिकारियों से आमने-सामने मुलाकात की। लेकिन यह कूटनीतिक प्रयास लंबे समय तक सकारात्मक माहौल नहीं बना सका।

इसी बीच तेहरान की ओर से होर्मुज को बंद करने की प्रतिक्रिया ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है। दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखाई दे रही है।

डर, सावधानी और अस्थिरता

ऊर्जा बाजार फिलहाल रिस्क मोड में चला गया है। निवेशक किसी भी बड़े भू-राजनीतिक फैसले का इंतजार कर रहे हैं। तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी इस बात का संकेत है कि बाजार भविष्य को लेकर अनिश्चित है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ता है, तो ब्रेंट क्रूड 85–90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में भी जा सकता है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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