NEET री-एग्जाम में सेंध:बिहार में बड़ा सॉल्वर रैकेट उजागर, 40 लाख की डील का खुलासा, 9 संदिग्ध समेत 24 गिरफ्तार

लखीसराय। NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को देशभर के 564 शहरों में सख्त सुरक्षा के बीच आयोजित की गई। लेकिन परीक्षा के दौरान बिहार के लखीसराय जिले में एक बड़ा सॉल्वर गैंग सामने आया, जिसने सिस्टम की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
पेपर लीक के बाद कराई गई इस री-एग्जाम में सुरक्षा के लिए सेना की निगरानी, एआई आधारित मॉनिटरिंग और जैमर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया था। इसके बावजूद कुछ लोगों ने परीक्षा व्यवस्था को चकमा देने की कोशिश की।
लखीसराय में 9 संदिग्ध परीक्षार्थी गिरफ्तार
लखीसराय में प्रशासन और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 9 संदिग्ध परीक्षार्थियों को हिरासत में लिया है, जिन्हें मुन्ना भाई कहा जा रहा है। केआरके हायर सेकेंडरी स्कूल से 1 व्यक्ति पकड़ा गया, केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र से 7 लोग गिरफ्तार और हसनपुर स्कूल केंद्र से 1 संदिग्ध हिरासत में लिया गया। सूत्रों के मुताबिक ये सभी लोग परीक्षा में दूसरों की जगह बैठकर पेपर देने की कोशिश कर रहे थे।
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बायोमेट्रिक सिस्टम से हुआ बड़ा खुलासा
जांच के दौरान बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली ने संदिग्ध गतिविधि को पकड़ लिया। परीक्षा केंद्रों पर जब अंगुलियों के निशान और फोटो मिलान किया गया, तो कई अभ्यर्थियों का डेटा मेल नहीं खा रहा था। इसी वजह से गड़बड़ी का शक गहराया और तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी गई। इसके बाद कुछ संदिग्धों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया।
30-40 लाख में हुआ था सौदा
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि यह कोई सामान्य नकल मामला नहीं था, बल्कि एक संगठित सॉल्वर नेटवर्क था। सूत्रों के अनुसार असली उम्मीदवारों की जगह परीक्षा देने के लिए सौदा किया गया। रकम 30 से 40 लाख रुपए तक तय हुई। मेडिकल कॉलेजों के छात्र इस नेटवर्क में शामिल थे।
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मेडिकल छात्रों और एजेंसी कर्मचारियों की मिलीभगत
पुलिस ने इस मामले में कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें PMCH, गया मेडिकल कॉलेज, AIIMS रायबरेली और BHU के मेडिकल छात्र और बायोमेट्रिक जांच करने वाली कंपनी के 14 कर्मचारी शामिल है।
पुलिस ने की कार्रवाई तेज
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि एक मेडिकल छात्र ने खुद बायोमेट्रिक कर्मचारी बनकर परीक्षा केंद्र में एंट्री ली थी। हसनपुर केंद्र से पूरा खुलासा शुरू हुआ। जांच में पता चला कि हाजीपुर निवासी मयंक नाम का मेडिकल छात्र इस पूरे नेटवर्क का अहम हिस्सा था। उसने फर्जी कर्मचारी बनकर हसनपुर परीक्षा केंद्र में प्रवेश किया। वहीं उसकी गतिविधियों पर शक हुआ और उसे पकड़ लिया गया। मयंक से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने आगे कार्रवाई तेज कर दी और अन्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में खुले कई बड़े राज
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को कई अहम जानकारी मिली। कई जिलों में फैला सॉल्वर नेटवर्क हुआ है। परीक्षा केंद्रों के अंदर तक पहुंचने की योजना पहले से बनाई गई थी और कुछ कर्मचारी जानबूझकर सिस्टम को बायपास करने में शामिल थे।
एसडीएम प्रभाकर कुमार और एसडीपीओ शिवम कुमार की टीम लगातार पूछताछ और छापेमारी कर रही है।
सुरक्षा के बावजूद कैसे पहुंचा गैंग अंदर?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बाद भी ये लोग परीक्षा केंद्रों तक कैसे पहुंच गए। परीक्षा के दौरान सेना की निगरानी लगाई गई थी, एआई से मॉनिटरिंग हो रही थी, जैमर लगाए गए थे और सख्त वेरिफिकेशन प्रक्रिया लागू थी, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग पहचान बदलकर और मिलीभगत से अंदर घुसने में सफल हो गए।
प्रशासन की निगरानी और आगे की जांच
पूरा मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस अलर्ट मोड पर हैं। जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार खुद मामले की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार ने जांच तेज करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि यह गैंग कितने राज्यों और जिलों तक फैला हुआ है।
परीक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में इस तरह की घटनाएं सिस्टम की मजबूती पर सवाल खड़े करती हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं ज्यादा मजबूत थी, लेकिन फिर भी कुछ लोग तकनीक और मिलीभगत के जरिए सिस्टम को चकमा देने में सफल रहे।











