बृजेश्वरी अग्निकांड: दिल दहला देने वाली घटना के बाद "मनोज"का आखिरी व्हाट्सएप स्टेटस

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दिल दहला देने वाली घटना के बाद "मनोज"का आखिरी व्हाट्सएप स्टेटस
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

     इंदौर के बृजेश्वरी (एनएक्स) में हुए खौफनाक अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर दिया, जहां मनोज पुगलिया समेत 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद मनोज का आखिरी व्हाट्सएप स्टेटस तेजी से वायरल हो रहा है “वक्त सबकुछ छीन सकता है, मगर हुनर और मेहनत से मिली पहचान नहीं छीन सकता।” यह शब्द अब अपनों के लिए आखिरी हौसला बन गए हैं, जिसे परिवार ने सहेजकर रख लिया है।

    मौत की इस भयावह रात का मंजर किसी डरावने सपने से कम नहीं था। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके का मुआयना किया, जहां पूरा घर जलकर खाक हो चुका था। नीचे किचन, डायनिंग हॉल और बेडरूम था, जिसमें गैस गीजर, फ्रिज, एसी और भारी फर्नीचर मौजूद था—जो आग को और भी भड़काने का कारण बने। रिश्तेदारों के मुताबिक, मनोज अपनी पत्नी सुनीता, साले विजय और सुमन के साथ नीचे ही सो रहे थे।

    हादसे की शुरुआत एक जोरदार धमाके जैसी आवाज से हुई—जैसे बाइक का टायर फटा हो। मनोज सबसे पहले जागे, लेकिन जैसे ही दरवाजा खोला, आग की विकराल लपटें भीतर घुस पड़ीं। हालात बिगड़ते देख उन्होंने सुनीता को बालकनी की ओर धकेला। बेटे सौरभ, सौमिल और हर्षित किसी तरह जाली तोड़कर बाहर निकलने में कामयाब हुए, लेकिन हर कोई इतना खुशकिस्मत नहीं था।

    मासूमों की चीखें उस रात गूंजती रहीं। रुचिका के बच्चे—11 साल की राशि और 8 साल का तनय—अपने नाना-नानी को बचाने के लिए नीचे दौड़े, लेकिन खुद ही आग के शिकंजे में फंस गए। सिमरन ने भी बाहर निकलने की कोशिश की, पर वह आग की भेंट चढ़ गई। बाद में उसका जला हुआ शव मिला।

    बचे हुए सौरभ की जुबानी उस रात की दहशत रोंगटे खड़े कर देती है—“मैं मां और भाइयों को लेकर बाहर आ गया, लेकिन पापा और बाकी लोग अंदर ही फंस गए। मैंने बार-बार चिल्लाकर कहा—पापा, सिमरन, कार्तिक बाहर आ जाओ... लेकिन धुएं ने सबको निगल लिया।” इस हादसे ने एक पूरे परिवार को खत्म कर दिया।

    इधर, हादसे के बाद अफवाहों का बाजार भी गर्म हो गया। गैस टंकियों, इलेक्ट्रिक लॉक और अन्य कारणों को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं। परिवार ने साफ किया कि घर में इलेक्ट्रिक लॉक नहीं था और कई दावे बेबुनियाद हैं। गीजर, एसी और फ्रिज जैसे उपकरण फटने से आग और भयानक हो गई।

    यह हादसा सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि लापरवाही, तकनीकी खामियों और अफवाहों के बीच छिपी एक कड़वी सच्चाई है, जिसने एक ही रात में हंसते-खेलते परिवार को राख में बदल दिया।

     

    Hemant Nagle
    By Hemant Nagle

    हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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