पटना। बिहार की सियासत एक नए मोड़ पर खड़ी है। सत्ता का पहिया घूम रहा है और हवा का रुख साफ इशारा कर रहा है कि अब राज्य को एक नया चेहरा मिलने वाला है। राजधानी पटना में हलचल तेज है, फैसलों की फाइलें खुल रही हैं और बंद दरवाजों के पीछे बड़ा खेल चल रहा है।
भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान पटना पहुंच चुके हैं। उनके साथ पार्टी के बड़े नेता भी मौजूद हैं। प्रदेश भाजपा कार्यालय को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। सिर्फ विधायक और वरिष्ठ नेताओं को ही अंदर जाने दिया जा रहा है। शाम 3 बजे भाजपा विधायक दल की बैठक होनी है, जहां नए नेता यानी मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला होगा।
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा सम्राट चौधरी के नाम की है। बताया जा रहा है कि उन्हें डिप्टी सीएम से प्रमोट कर मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि अभी आधिकारिक घोषणा बाकी है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि पार्टी का झुकाव पूरी तरह सम्राट चौधरी की तरफ है।
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वहीं दूसरी तरफ नीतीश कुमार ने अपनी कैबिनेट की आखिरी बैठक कर ली है। अब वे राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे। इस इस्तीफे के साथ ही बिहार में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी
शाम 4 बजे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें सभी सहयोगी दल नए नेता के नाम को मंजूरी देंगे। इसके बाद नया नेता सरकार बनाने का दावा पेश करेगा।
15 अप्रैल को सुबह 11 बजे राजभवन (लोक भवन) में नई सरकार का शपथ ग्रहण होगा। इसमें मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री शपथ लेंगे।
इस समारोह में दिल्ली से कई बड़े नेता शामिल हो सकते हैं। माहौल पूरी तरह से राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन जैसा रहेगा।
सूत्रों के मुताबिक, डिप्टी सीएम के लिए दो नाम निशांत कुमार (नीतीश कुमार के बेटे) और विजय चौधरी लगभग तय माने जा रहे हैं। अगर ऐसा होता है, तो ये बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा।
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16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। उनके पिता शकुनी चौधरी एक बड़े समाजवादी नेता रहे हैं। उन्होंने कभी लालू प्रसाद यादव के साथ राजनीति की थी, बाद में नीतीश कुमार के साथ आ गए। सम्राट चौधरी ने भी अपने पिता के साथ राजनीति की शुरुआत की और धीरे-धीरे खुद को मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक करियर कई मोड़ों से गुजरा है शुरुआत में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) फिर जनता दल यूनाइटेड (JDU) और अब भारतीय जनता पार्टी (BJP)। उन्होंने तेजस्वी यादव और लालू यादव के खिलाफ राजनीति की, जबकि शुरुआत उन्हीं की पार्टी से की थी।
अगर सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनते हैं, तो वे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री होंगे। इतना ही नहीं, वे उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हो जाएंगे जो पहले डिप्टी सीएम रहे और फिर मुख्यमंत्री बने।इससे पहले यह रिकॉर्ड सिर्फ कर्पूरी ठाकुर के नाम था।
बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण बेहद अहम होता है। इन दोनों को साथ लाकर बीजेपी एक मजबूत सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
सम्राट चौधरी: कुशवाहा समाज
निशांत कुमार: कुर्मी समाज
हालांकि सब कुछ तय दिख रहा है, लेकिन राजनीति में आखिरी वक्त तक कुछ भी बदल सकता है। सम्राट चौधरी का अतीत (RJD और JDU से जुड़ाव) और उनके पिता का पीएम मोदी विरोधी रुख कभी-कभी सवाल खड़े करता है। अब फैसला बीजेपी और आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व को करना है कि उनका अपना मुख्यमंत्री कौन होगा।
बिहार अब बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। पुराने समीकरण टूट रहे हैं और नए बन रहे हैं। आज शाम का फैसला सिर्फ एक नाम का ऐलान नहीं होगा, बल्कि आने वाले कई सालों की राजनीति की दिशा तय करेगा।