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भोपाल:ट्रैफिक अनाउंसमेंट सिस्टम के खिलाफ NGT पहुंचा मामला, तेज आवाज को बताया स्वास्थ्य के लिए खतरा

भोपाल में ट्रैफिक अनाउंसमेंट सिस्टम की तेज़ आवाज़ के खिलाफ मामला अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तक पहुंच गया है। याचिका में इस तेज शोर को स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया गया है।
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ट्रैफिक अनाउंसमेंट सिस्टम के खिलाफ NGT पहुंचा मामला, तेज आवाज को बताया स्वास्थ्य के लिए खतरा

भोपाल में ट्रैफिक पुलिस और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगाए गए पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम अब कानूनी जांच के दायरे में आ गए हैं। शहर के कई चौराहों और सड़कों पर तेज आवाज में लगातार चलने वाले ट्रैफिक संदेशों और चेतावनियों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में याचिका दायर की गई है। पर्यावरणविद् राशिद नूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए NGT की सेंट्रल जोन बेंच ने प्रशासन, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

अस्पताल, स्कूल और रिहायशी इलाकों में तेज आवाज पर सवाल

याचिका में कहा गया है कि शहर में लगाए गए कई पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम पूरे दिन तेज आवाज में चलते रहते हैं। इनकी ध्वनि इतनी अधिक होती है कि आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि कई जगह यह सिस्टम अस्पतालों, स्कूलों, कोर्ट परिसर और रिहायशी इलाकों के पास भी संचालित किए जा रहे हैं जबकि नियमों के अनुसार इन क्षेत्रों को साइलेंस जोन माना जाता है। ऐसे स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त नियम लागू हैं।

NGT ने कहा- लगातार शोर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा

सुनवाई के दौरान NGT ने माना कि लगातार तेज आवाज केवल असुविधा का मामला नहीं है बल्कि यह लोगों की सेहत पर भी गंभीर असर डाल सकती है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण से तनाव, चिड़चिड़ापन, नींद में परेशानी और एकाग्रता प्रभावित हो सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रत्येक नागरिक को शांत और प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार है।

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तय सीमा से ज्यादा आवाज वाले सिस्टम पर कार्रवाई के निर्देश

NGT ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम की आवाज तय डेसिबल सीमा से अधिक है या जिनके पास आवश्यक अनुमति नहीं है उन्हें तुरंत बंद किया जाए या उनकी आवाज नियंत्रित की जाए। ट्रिब्यूनल ने कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर को भी ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। वहीं मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

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अधिवक्ता ने रखा पक्ष

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पक्ष रखा। सुनवाई न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच में हुई।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

मास कम्युनिकेशन में Ph.D और M.Phil पूर्ण की है तथा टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते ...Read More

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