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भोपाल डबल मर्डर केस : करोड़ों की प्रॉपर्टी के लालच में रची खौफनाक साजिश, 20 दिन में 1500 सीसीटीवी फुटेज खंगाले तब पुलिस की गिरफ्त में आए दो प्रॉपर्टी डीलर भाई

भोपाल के ऐशबाग स्थित सुदामा नगर में रिटायर्ड दंपती हेमंत फिलेमोन और शकुंतला फिलेमोन की हत्या के मामले में पुलिस ने करीब 20 दिन बाद दो प्रॉपर्टी डीलरों को हिरासत में लिया है। जांच में सामने आया है कि करोड़ों रुपये की संपत्ति हथियाने के लिए आरोपियों ने पहले दंपती का भरोसा जीता, फिर कथित तौर पर एक दानपत्र तैयार कराया और जब मकान बिकने की नौबत आई तो हत्या की साजिश रच दी।
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 करोड़ों की प्रॉपर्टी के लालच में रची खौफनाक साजिश, 20 दिन में 1500 सीसीटीवी फुटेज खंगाले तब पुलिस की गिरफ्त में आए दो प्रॉपर्टी डीलर भाई
भोपाल। पुलिस कमिश्नर ने डबल मर्डर को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया।

भोपाल। ऐशबाग थाना क्षेत्र स्थित सुदामा नगर में रिटायर्ड दंपती हेमंत फिलेमोन और शकुंतला फिलेमोन की हत्या के सनसनीखेज मामले में पुलिस को अहम सफलता मिली है। करीब 20 दिन की पड़ताल के बाद पुलिस ने प्रॉपर्टी डीलिंग से जुड़े शशिकांत और श्रीकांत को हिरासत में लिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों लंबे समय से दंपती के करीबी थे और उनकी संपत्तियों के लेनदेन से जुड़े काम संभालते थे। पुलिस का मानना है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर पूरी साजिश रची गई। पुलिस ने करीब  1500 सीसीटीवी फुटेज  खंगाले और  100 से ज्यादा संदिग्धों से  पूछताछ की तब आरोपियों का सुराग मिला। 

दानपत्र बना जांच का सबसे अहम सुराग

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कुछ समय पहले आरोपियों ने इटारसी में दंपती का एक प्लॉट बिकवाया था। इसी प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर एक दानपत्र भी तैयार कराया गया, जिसमें दंपती की मृत्यु के बाद सुदामा नगर स्थित करोड़ों रुपए की संपत्ति आरोपियों के नाम करने का उल्लेख था। पुलिस अब इस दस्तावेज की वैधता, इसे तैयार करने की परिस्थितियों और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

मकान बेचने का फैसला बना साजिश की वजह 

पुलिस के अनुसार आरोपियों को उम्मीद थी कि भविष्य में दंपती की मृत्यु के बाद उन्हें संपत्ति मिल जाएगी। लेकिन हाल ही में बुजुर्ग दंपती ने अपना सुदामा नगर स्थित मकान बेचने का फैसला कर लिया। मकान का सौदा लगभग तय होने की जानकारी मिलते ही आरोपियों को आशंका हुई कि यदि संपत्ति बिक गई तो कथित दानपत्र का कोई महत्व नहीं रहेगा। यहीं से लालच ने कथित तौर पर हत्या की साजिश का रूप ले लिया।

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20 दिन बाद ऐसे खुला राज 

26 जून को दोनों के शव घर के अंदर सड़ी-गली अवस्था में मिले थे, जिससे पूरे शहर में सनसनी फैल गई थी। शुरुआत में पुलिस के सामने कई सवाल थे, लेकिन मोबाइल रिकॉर्ड, आर्थिक लेनदेन, दस्तावेजों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच धीरे-धीरे आगे बढ़ी। इन्हीं सबूतों के आधार पर दोनों संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जाएगा।

सामने आ सकते हैं नए खुलासे 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि कथित दानपत्र तैयार कराने में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा क्या इस साजिश में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही। जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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रिश्तेदार शिवानी भी शक के घेरे में 

इस हत्याकांड के तार केवल प्रॉपर्टी डीलरों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि परिवार के अंदर भी जा रहे हैं। पुलिस अब मृतका की करीबी रिश्तेदार शिवानी बारीक की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच में पता चला है कि शिवानी पर बैंक और निजी उधारी मिलाकर 20 लाख रुपए से अधिक का कर्ज था। हत्या से ठीक कुछ दिन पहले शिवानी के बैंक खाते में 6 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। शिवानी लगातार दोनों आरोपी प्रॉपर्टी डीलरों के संपर्क में भी थी। पुलिस अब इन वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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