मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के व्यस्त इलाके 10 नंबर मार्केट में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक दुकानदार ने कथित तौर पर खुद को आग लगा ली। इस घटना ने न केवल बाजार में अफरा-तफरी फैला दी बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक नगर निगम की टीम मौके पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान एक दुकानदार ने विरोध स्वरूप अपने ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा ली। अचानक हुई इस घटना से पूरे बाजार में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
घटना होते ही आसपास मौजूद लोगों और अन्य व्यापारियों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए आग बुझाने का प्रयास किया। स्थानीय लोगों की तत्परता के कारण बड़ी अनहोनी टल गई और घायल दुकानदार को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि उसकी स्थिति को लेकर आधिकारिक रूप से ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन बताया जा रहा है कि उसे गंभीर हालत में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।
जानकारी के अनुसार नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटाने के लिए पहले से चिन्हित दुकानों पर कार्रवाई कर रही थी। इस अभियान का नेतृत्व अतिक्रमण अधिकारी सृष्टि भदोरिया की टीम कर रही थी। कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानों को तोड़ा जा रहा था, जिससे प्रभावित व्यापारियों में असंतोष फैल गया। इसी असंतोष के बीच यह चरम कदम उठाया गया, जिसने पूरे अभियान को विवादों में घेर लिया।
घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों ने प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निष्पक्ष तरीके से नहीं की जा रही बल्कि केवल कुछ चुनिंदा दुकानों को ही निशाना बनाया जा रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि पूरे बाजार में कई जगह अतिक्रमण है लेकिन कार्रवाई केवल सीमित दुकानों तक ही क्यों सीमित है, यह स्पष्ट नहीं है। इससे पक्षपात और भेदभाव के आरोप सामने आ रहे हैं।
इस घटना के बाद 10 नंबर मार्केट के व्यापारियों में भारी आक्रोश देखने को मिला। कई व्यापारियों ने मौके पर ही विरोध जताया और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। कुछ व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई इसी तरह जारी रही, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। बाजार में तनाव का माहौल बना हुआ है और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की मौजूदगी भी बढ़ाई गई है।
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घटना के बाद यह सवाल भी तेजी से उठने लगे हैं कि आखिर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई किन आधारों पर की जा रही है। क्या सभी दुकानों का समान रूप से निरीक्षण किया गया था, या फिर कुछ विशेष दुकानों को ही निशाना बनाया गया? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार्रवाई पारदर्शी और समान रूप से होती, तो इस तरह की स्थिति पैदा नहीं होती। यह मामला अब केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है।
घटना के तुरंत बाद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि दुकानदार ने किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया। इसके साथ ही अतिक्रमण हटाने की पूरी प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं किसी स्तर पर कोई लापरवाही या पक्षपात तो नहीं हुआ।