भोपाल में महाभारत समागम :16 जनवरी से नौ दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव, देश-विदेश के कलाकार भी देंगे प्रस्तुति

भोपाल के भारत भवन में 16 से 24 जनवरी 2026 तक महाभारत समागम आयोजित होगा। नौ दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में नाट्य, नृत्य, कठपुतली, प्रदर्शनी और अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के जरिए महाभारत के युद्ध और शांति संदेश को प्रस्तुत किया जाएगा। यह आयोजन शांति, करुणा और सभ्यताओं के संघर्ष और औदार्य की महागाथा पर केंद्रित है।
16 जनवरी से नौ दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव, देश-विदेश के कलाकार भी देंगे प्रस्तुति
भोपाल में महाभारत समागम 16 से 24 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा
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    भोपाल के भारत भवन में 16 से 24 जनवरी 2026 तक महाभारत समागम आयोजित किया जाएगा। यह देश का पहला और अब तक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन है, जो महाभारत की वैश्विक सभ्यताओं के संघर्ष और औदार्य की महागाथा पर केन्द्रित होगा। वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव एवं मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्री राम तिवारी ने कार्यक्रम स्थल पहुंचकर शुक्रवार से होने वाले कार्यक्रम का जायजा लिया। 

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    9 दिवसीय समागम की प्रमुख प्रस्तुतियां

    • नाटक और नृत्य-नाट्य
    • कठपुतली वर्कशॉप
    • लोक एवं शास्त्रीय प्रस्तुतियां
    • अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल
    • इमर्सिव डोम थियेटर, जिसके माध्यम से युद्ध के खिलाफ शांति का संदेश दिया जाएगा।

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    प्रदर्शनी और पुस्तक लोकार्पण

    समागम के दौरान आयोजित गतिविधियां- नेपथ्य, अस्त्र-शस्त्र, चक्रव्यूह और पताकाएं, महाभारत आधारित चित्र प्रदर्शनी, भारतीय कठपुतली प्रदर्शन, ‘सभ्यताओं की सांस’ (वैश्विक कविताओं का संकलन), ‘भूली बिसरी सभ्यताएं’ पुस्तकों का लोकार्पण। इस समागम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया जाएगा।

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    श्रीकृष्ण का संदेश आज भी प्रासंगिक

    वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव एवं मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्री राम तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया युद्ध, हिंसा और टूटती सभ्यताओं का सामना कर रही है। महाभारत हमें आत्ममंथन और शांति का मार्ग दिखाता है। महाभारत युद्ध में शामिल 185 से अधिक जनजातियां थीं। श्रीकृष्ण ने बल की बजाय संवाद और विवेक को प्राथमिकता दी। उन्होंने धर्म के मार्ग को त्याग और सहमति के माध्यम से स्थापित किया। युद्ध का उद्देश्य हमेशा न्याय और लोककल्याण होना चाहिए।

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    वैश्विक सभ्यताओं की सहभागिता

    श्रीराम तिवारी ने बताया कि वैश्विक सभ्यताओं का इतिहास संघर्ष और औदार्य की साझा गाथा है। संघर्ष ने दृढ़ता, साहस और पहचान दी, जबकि औदार्य ने सहअस्तित्व, करुणा और संवाद सिखाया। इस समागम में इंडोनेशिया, श्रीलंका और जापान के प्रतिष्ठित नाट्य समूह अपनी प्रस्तुतियां देंगे। वीर भारत न्यास ने कहा कि आने वाले वर्षों में इस समागम को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और भी व्यापक रूप से आयोजित किया जाएगा।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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