शाहिद खान-बृजेंद्र वर्मा, भोपाल। मध्य भारत का उभरता शहरी चेहरा भोपाल पिछले पांच वर्षों में विकास की रफ्तार से जिस तरह बदला है, उसने इसे महानगर बनने की दौड़ में खड़ा किया है। शहर का दायरा लगातार बढ़ रहा है और नए आवासीय-व्यावसायिक क्षेत्र तेजी से बस रहे हैं। शहर का विस्तार अब पारंपरिक सीमाओं से निकलकर कोलार, कटारा हिल्स, बावड़िया कलां, बागसेवनिया और एयरपोर्ट रोड जैसे इलाकों तक फैल चुका है। जहां पर नई कॉलोनियां, अपार्टमेंट, स्कूल, अस्पताल और बाजार विकसित हो रहे हैं। जबकि आने वाले दिनों में भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी होगा, तब इसका दायरा सीहोर, बैरसिया, विदिशा और रायसेन तक फैल जाएगा।
1961 में भोपाल की आबादी 2.5 लाख के आसपास थी, जबकि आज यह बढ़कर लगभग 30 लाख पहुंच चुकी है। इसी दौरान शहर का दायरा कई गुना बढ़ा और पुराने शहर की सीमाओं से निकलकर नए उपनगरों और कॉरिडोर तक फैल गया। 1975 में 26.3 वर्ग किलो मीटर दायरे में सिमटा शहर आज 185.19 वर्ग किलो मीटर तक फैल चुका है। कोलार, नर्मदापुरम रोड तो शहर के मुख्य हिस्से बन चुके हैं।
आने वाले दिनों में मेट्रोपॉलिटन सिटी में बदलने से भोपाल का दायरा 10 हजार वर्ग किमी के पार होने वाला है। भोपाल के अलावा रायसेन, सीहोर, विदिशा, राजगढ़, नर्मदापुरम जिलों को मिलाकर सिटी बनाई जाएगी।
वर्तमान में भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। इसकी अनुमानित लागत 7,000 करोड़ है। प्रॉयोरिटी कॉरिडोर पूरा हो चुका है। भदभदा से रत्नागिरी तक ब्लू लाइन और करोंद से सिंधी कॉलोनी वाया सुभाष नगर तक ऑरेंज लाइन का काम चल रहा है। इनकी डेड लाइन 2030 तय की गई है।
भोपाल को स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत चुना जाना शहर के विकास का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसमें कई हाईटेक सुविधाएं लागू की गर्इं। इन प्रोजेक्ट्स ने शहर की सुरक्षा, सफाई और ट्रैफिक सेवाओं को आधुनिक रूप दिया है। शहर में अब ये सुविधाएं हैं-इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्मार्ट एलईडी स्ट्रीट लाइट, कमांड कंट्रोल सेंटर, डिजिटल निगरानी कैमरा, स्मार्ट पार्क, सार्वजनिक स्थान, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम।
पिछले दशकों में भोपाल में एमएसएमई उद्योग, स्टार्टअप सेक्टर, शिक्षा और आईटी सेवाएं, निर्माण उद्योग तेजी से बढ़े हैं। नए इंडस्ट्रियल क्षेत्र और लॉजिस्टिक हब विकसित होने से रोजगार के अवसर बढ़े हैं और यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। भोपाल के आसपास के सभी औद्योगिक क्षेत्र पूरी तरह भर चुके हैं। अब नई जगह की तलाश की जा रही है।
BHEL...यहीं से उद्योग की शुरुआत : 1960 के आसपास शहर में उद्योग की शुरुआत यहीं से हुई। ट्रांसफार्मर, टर्बाइन का प्रमुख कारखाना है।
मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र : पहली बार प्रदेश में मल्टी स्टोरी इंडस्ट्री का निर्माण किया जा रहा है। यहां 400 इकाइयां हैं।
अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र : यहां टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग है। यह 146 हेक्टेयर में फैला हुआ है।
गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, पीलूखेड़ी : यहां कई लघु और मध्यम उद्योग हैं।
जंबार बागरी : विदिशा रोड पर नया औद्योगिक क्षेत्र
रेलवे कोच कारखाना : भोपाल से लगे कारखाने में मेट्रो रेल और वंदे भारत के कोच और आधुनिक उपकरण बनेंगे।

पिछले तीन दशकों में भोपाल में सड़कों का जाल तेजी से फैला है। चौड़ी सड़कों, नए फ्लाईओवर, रिंग रोड और बायपास बनने से शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच दूरी कम हुई है। फ्लाईओवर और रेल ओवरब्रिज ने ट्रैफिक का दबाव कम किया है। पहला ऐसा शहर है, जहां से सिक्सलेन शहर के अंदर बनी है।
शहर की परिवहन व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान तब मिली जब रानी कमलापति रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया गया। राजा भोज हवाई अड्डा के विस्तार और उड़ानों की संख्या बढ़ने से भोपाल व्यापार, पर्यटन और निवेश के लिए अधिक आकर्षक बना है।

देश की पहली राजधानी है, जहां शहर से लगा हुआ रातापानी टाइगर रिजर्व है। शहर में पूरे दिन जहां आम लोगों का आवागमन होता है, वहीं रात में शहर में टाइगर भ्रमण करते हैं। इस टाइगर रिजर्व से हाईवे भी निकला है, जहां वन्य प्राणियों के लिए साउंड प्रूफ दीवारें बनाई गई हैं।

भोपाल का उपनगर कोलार में विकास बीते 2 दशकों से सरपट दौड़ा है। फिर चाहे वो राजहर्ष में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज बनना या बंजारी में खेल मैदान का निर्माण हो, या फिर कोलार में केरवा पेयजल योजना, सीवेज नेटवर्क परियोजना सहित कोलार रोड को सिक्सलेन करने की योजना। इन प्रमुख बड़े विकास कार्यों ने कोलार क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। साल 2006 से पहले जब कोलार पंचायत में था, तब प्रॉपर्टी के दाम 100 से 150 रुपए प्रति वर्गफीट थे, अब उन्हीं स्थानों पर प्रॉपर्टी के दाम 5000 रुपए तक हो गए हैं। साल 2003 में कोलार की आबादी 15 से 20 हजार हुआ करती थी, जो अब 4 लाख के पार हो गई है।
कोलार क्षेत्र में 2006 से पहले दामखेड़ा, बंजारी, अकरबरपुर, नयापुरा, हिनौतिया आलम, बैरागढ़ चीचली पंचायत, सेमरीकलां पंचायत हुआ करती थीं। साल 2006 में कोलार नगर पालिका का गठन हुआ। नवंबर 2007 में नगर पालिका के 21 वार्डों के चुनाव हुए। 2014 में नगर पालिका का भोपाल नगर निगम में विलय किया गया। कोलार क्षेत्र नगर निगम में शामिल हुआ। यहां के 21 वार्ड मिला कर नगर निगम के वार्ड 80, 81, 82, 83, 84 बने। इसके बाद सिक्सलेन ने तस्वीर बदल दी। यहां सारे बड़े शोरूम, हॉस्पिटल भी हैं।
नीलबड़-रातीबड़ की ओर एक नया उपनगर विकसित हो रहा है। बीते डेढ़ दशक में यहां तेजी से विकास कार्य हुए हैं। भदभदा ब्रिज खत्म होते ही सूरज नगर शुरू हो जाता है। इसके बाद सेवनियां गौड़, नाथूबरखेड़ा, नीलबड़, रातीबड़ आता है। बात डेढ़ दशक पुरानी करें, तो सूरज नगर के तिराहे से नीलबड़-रातीबड़ जाने के लिए एक टू लेन रोड हुआ करती थी। साल 2014 में सूरज नगर, सेवनियां गौड़ सहित नीलबड़ का कुछ हिस्सा मिलाकर वार्ड-26 अस्तित्व में आया। फोरलेन बनने से प्रॉपर्टी के दाम बढ़ने लगे। इस इलाके में प्रॉपर्टी के दाम 50 से 100 रुपए प्रति वर्गफीट थे। कलेक्टर गाइड लाइन में प्रॉपर्टी के दाम दोगुने-तिगुने हो गए हैं।
साल-2011 में राजाभोज एयरपोर्ट की नई बिल्डिंग बनी। गांधी नगर की ओर से रास्ता होने से आसपास के क्षेत्र का तेजी से विकासशुरू हो गया। बीडीए के एयरो सिटी प्रोजेक्ट सहित निजी कॉलोनाइजरों के आने से केंद्रीय जेल रोड की ओर से विकास की रफ्तार बढ़ना शुरू हो गई। आईटी पार्क आने से यहां का तेजी से विकास हुआ।

साल 2009-10 में बैरागढ़ के सीहोर नाका से लेकर मिसरोद तक बीआरटीएस कॉरिडोर का निर्माण हुआ। सिटी बसों का संचालन मिसरोद तक शुरू हुआ। बागसेवनिया थाना, आशिमा मॉल, मिसरोद और कटारा हिल्स में 25 आवासीय प्रोजेक्ट्स के तहत कई कॉलोनियां बनने लगीं। अब बर्रई, कोकता और मंडीदीप तक आबादी बस चुकी है।
पिछले लगभग पांच दशकों से भोपाल में रह रहे 72 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक हाशिम अली बताते हैं कि उन्होंने शहर को सचमुच बदलते हुए देखा है। उनके अनुसार, जब मैं 1970 के दशक में यहां आया, तब भोपाल सीमित दायरे वाला शांत शहर था। यहां गिने-चुने बाजार और कुछ मुख्य सड़कें ही थीं। उस समय जिन जगहों को शहर से बाहर माना जाता था, आज वे मुख्य इलाके बन चुके हैं। जहां खेत और खाली जमीन हुआ करती थी, वहां अब कॉलोनियां, बड़ी इमारतें और व्यावसायिक कॉम्पलेक्स खड़े हैं। सबसे बड़ा बदलाव सड़क और कनेक्टिविटी में आया है। पहले एक इलाके से दूसरे इलाके तक पहुंचने में लंबा समय लगता था। भोपाल आज आधुनिकता से भरा शहर बन चुका है और यह बदलाव उनके बचपन से बुढ़ापे तक हुआ।
भोपाल अब केवल प्रशासनिक या पर्यटन शहर नहीं रहा, बल्कि तेजी से उभरते शिक्षा केंद्र के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है। शैक्षणिक विकास सिर्फ संस्थानों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गुणवत्ता, विविधता और अवसरों का नाम है। राष्ट्रीय संस्थानों की मौजूदगी, बढ़ती शैक्षणिक सुविधाएं और अनुकूल वातावरण ने राजधानी को एक सशक्त एजुकेशनल हब बना दिया है। शैक्षणिक साख को सबसे ज्यादा मजबूती यहां स्थापित राष्ट्रीय संस्थानों से मिली है। मैनिट इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से उत्कृष्टता का केंद्र बना हुआ है। एनआईएफटी और एसपीए जैसे संस्थानों की मौजूदगी ने शहर को शिक्षा का केंद्र बना दिया है। हालांकि झीलों के इस शहर को अतिक्रमणकारियों की नजर से बचाना जरूरी है। क्योंकि दिन ब दिन तालाब सिकुड़ता जा रहा है।
कमल राठी, एनवॉयरमेंट एंड अर्बन एक्सपर्ट