भोपाल :1.5 लाख तक का 'मुफ्त इलाज', मदद करने वालों को 25 हजार का इनाम

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अब सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों के लिए 'गोल्डन ऑवर' (हादसे के ठीक बाद का पहला घंटा) काल नहीं बनेगा। स्वास्थ्य विभाग ने घायलों की जान बचाने के लिए दो क्रांतिकारी योजनाओं'पीएम राहत' और 'राहवीर'पर काम तेज कर दिया है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को बिना किसी कागजी कार्रवाई या पैसों की चिंता के तुरंत इलाज उपलब्ध कराना है। भोपाल में आयोजित एक विशेष कार्यशाला में जिले के सभी पंजीकृत अस्पतालों को इन योजनाओं की बारीकियों और जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया।
7 दिन तक मिलेगा 'कैशलेस' इलाज: 1.5 लाख का सुरक्षा कवच
अक्सर देखा जाता है कि सड़क हादसे के बाद इलाज में होने वाली देरी का सबसे बड़ा कारण पैसों का अभाव या अस्पताल की फॉर्मेलिटी होती है। पीएम राहत योजना रइसी बाधा को दूर करती है।
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इस योजना के तहत:
- सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को हादसे की तारीख से लेकर अगले 7 दिनों तक पूरी तरह से कैशलेस (मुफ्त) उपचार मिलेगा।
- प्रति व्यक्ति इलाज की अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपए तय की गई है।
- साधारण चोट के मामलों में 24 घंटे और गंभीर स्थितियों में 48 घंटे तक का 'स्टेबलाइजेशन' (हालत स्थिर करने वाला) उपचार अनिवार्य रूप से दिया जाएगा।
- पूरी प्रक्रिया को पुलिस वेरिफिकेशन और एक अत्याधुनिक डिजिटल सिस्टम से जोड़ा गया है, ताकि अस्पताल को भुगतान में देरी न हो।
'राहवीर' योजना: फरिश्तों को मिलेगा 25,000 का प्रोत्साहन
हादसे के वक्त लोग अक्सर पुलिसिया पूछताछ या कानूनी झंझटों के डर से घायलों की मदद करने से कतराते हैं। इसी झिझक को खत्म करने के लिए 'राहवीर योजना' शुरू की गई है। अब यदि कोई राहगीर किसी सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय रहते अस्पताल पहुंचाता है, तो सरकार उसे 25,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित करेगी। अधिकारियों का मानना है कि यह आर्थिक सहायता लोगों को 'गुड सेमेरिटन' (नेक मददगार) बनने के लिए प्रेरित करेगी और सड़क पर तड़पते घायलों को समय पर अस्पताल मिल सकेगा।
गोल्डन ऑवर: 50% मौतें टालने का मास्टर प्लान
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क हादसे के बाद का पहला एक घंटा जिसे 'गोल्डन ऑवर' कहा जाता है, किसी भी घायल की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। कार्यशाला में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक यदि इस एक घंटे के भीतर घायल को सही डॉक्टरी सहायता मिल जाए, तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली 50% मौतों को रोका जा सकता है। भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि इन योजनाओं को इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS) 112 से सीधे जोड़ा गया है। अब 112 डायल करते ही न केवल एम्बुलेंस मिलेगी बल्कि नजदीकी अस्पताल को भी तुरंत अलर्ट मिल जाएगा।
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अस्पतालों के लिए सख्त निर्देश और डिजिटल समन्वय
स्वास्थ्य विभाग की कार्यशाला में जिले के सभी प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने साफ किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
योजना की कार्यप्रणाली:
1. डिजिटल ट्रैकिंग : हादसे की सूचना मिलते ही डिजिटल पोर्टल पर घायल की एंट्री होगी।
2. आपसी समन्वय : पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़े रहेंगे।
3. त्वरित भुगतान : अस्पतालों को इलाज के खर्च का भुगतान सरकार द्वारा डिजिटल माध्यम से सीधे किया जाएगा।





















