भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अब सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों के लिए 'गोल्डन ऑवर' (हादसे के ठीक बाद का पहला घंटा) काल नहीं बनेगा। स्वास्थ्य विभाग ने घायलों की जान बचाने के लिए दो क्रांतिकारी योजनाओं'पीएम राहत' और 'राहवीर'पर काम तेज कर दिया है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को बिना किसी कागजी कार्रवाई या पैसों की चिंता के तुरंत इलाज उपलब्ध कराना है। भोपाल में आयोजित एक विशेष कार्यशाला में जिले के सभी पंजीकृत अस्पतालों को इन योजनाओं की बारीकियों और जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया।
अक्सर देखा जाता है कि सड़क हादसे के बाद इलाज में होने वाली देरी का सबसे बड़ा कारण पैसों का अभाव या अस्पताल की फॉर्मेलिटी होती है। पीएम राहत योजना रइसी बाधा को दूर करती है।
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इस योजना के तहत:
हादसे के वक्त लोग अक्सर पुलिसिया पूछताछ या कानूनी झंझटों के डर से घायलों की मदद करने से कतराते हैं। इसी झिझक को खत्म करने के लिए 'राहवीर योजना' शुरू की गई है। अब यदि कोई राहगीर किसी सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय रहते अस्पताल पहुंचाता है, तो सरकार उसे 25,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित करेगी। अधिकारियों का मानना है कि यह आर्थिक सहायता लोगों को 'गुड सेमेरिटन' (नेक मददगार) बनने के लिए प्रेरित करेगी और सड़क पर तड़पते घायलों को समय पर अस्पताल मिल सकेगा।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क हादसे के बाद का पहला एक घंटा जिसे 'गोल्डन ऑवर' कहा जाता है, किसी भी घायल की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। कार्यशाला में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक यदि इस एक घंटे के भीतर घायल को सही डॉक्टरी सहायता मिल जाए, तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली 50% मौतों को रोका जा सकता है। भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि इन योजनाओं को इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS) 112 से सीधे जोड़ा गया है। अब 112 डायल करते ही न केवल एम्बुलेंस मिलेगी बल्कि नजदीकी अस्पताल को भी तुरंत अलर्ट मिल जाएगा।
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स्वास्थ्य विभाग की कार्यशाला में जिले के सभी प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने साफ किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
योजना की कार्यप्रणाली:
1. डिजिटल ट्रैकिंग : हादसे की सूचना मिलते ही डिजिटल पोर्टल पर घायल की एंट्री होगी।
2. आपसी समन्वय : पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़े रहेंगे।
3. त्वरित भुगतान : अस्पतालों को इलाज के खर्च का भुगतान सरकार द्वारा डिजिटल माध्यम से सीधे किया जाएगा।