भोपाल में आवारा कुत्तों का आतंक:रोजाना 80 से ज्यादा लोग हो रहे डॉग बाइट के शिकार, ऐशबाग में 15 कुत्तों के झुंड से दहशत

भोपाल। रहवासियों का कहना है कि कुत्तों का झुंड राह चलते लोगों का पीछा करता है और भगाने की कोशिश करने पर पूरा झुंड हमला कर देता है। नगर निगम को रोजाना करीब 15 शिकायतें मिल रही हैं, जबकि शहर में प्रतिदिन 80 से 90 लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं। भोपाल में करीब 1.20 लाख आवारा कुत्ते होने का अनुमान है। अब लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
ऐशबाग में कुत्तों का आतंक
राजधानी का तंग गलियों और घनी रिहाइशी ऐशबाग इलाका इन दिनों 14 से 15 आवारा कुत्तों के गैंग की दहशत में है। यह झुंड जब सुबह-शाम निकलता है तो सड़कें सूनी हो जाती हैं। लोग घरों के दरवाजे बंद कर लेते हैं और बच्चे बाहर खेलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर रात में काम से लौटने वाले लोगों तक हर कोई इनके डर में जी रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार इंदिरा कॉलोनी, जैन कॉलोनी, रोशन बाग, मदीना मार्केट, ऐशबाग मेन रोड सहित आठ से दस कॉलोनियां इससे प्रभावित हैं। इलाके के सरकारी और निजी स्कूलों के बाहर भी बच्चों की सुरक्षा के लिए स्टाफ डंडा लेकर खड़ा रहता है।
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रहवासियों ने बताई रोज की परेशानी
स्थानीय निवासी सैयद अलयास अली का कहना है कि नगर निगम को कई बार शिकायत की जा चुकी है। निगम की टीम कुछ कुत्तों को पकड़कर ले जाती है, लेकिन कुछ दिन बाद वही या नए कुत्ते फिर दिखाई देने लगते हैं। सलीम कुरैशी के अनुसार रात के समय हालात और गंभीर हो जाते हैं, जब कुत्तों के झुंड बाइक और पैदल चलने वालों का पीछा करते हैं। मोहम्मद अजहर ने अभियान चलाकर कुत्तों की नसबंदी और प्रभावी प्रबंधन की मांग की है। वहीं कमरुद्दीन का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और छोटे बच्चों को हो रही है और समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है।
रोजाना 80 से 90 लोग हो रहे डॉग बाइट का शिकार
बता दें कि नगर निगम को आवारा कुत्तों से जुड़ी करीब 15 शिकायतें रोजाना मिल रही हैं। जेपी और हमीदिया अस्पताल में हर दिन डॉग बाइट के मरीज पहुंच रहे हैं। भोपाल में रोजाना औसतन 80 से 90 लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं। शहर में करीब 1.20 लाख आवारा कुत्ते हैं, जबकि पिछले पांच वर्षों में नसबंदी और वैक्सीनेशन पर 8.56 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद समस्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ती नजर आ रही है।
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एबीसी सेंटर की क्षमता कम, डॉग शेल्टर नहीं
नगर निगम के पास अरवलिया, आदमपुर छावनी और कजलीखेड़ा में तीन एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर हैं, लेकिन इनकी कुल क्षमता केवल 600 कुत्तों की है। यहां प्रतिदिन सिर्फ 20 से 25 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हो पाता है। शहर में अभी तक एक भी स्थायी डॉग शेल्टर नहीं है। हालांकि निगम नए शेल्टर बनाने की तैयारी कर रहा है, ताकि समस्या पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा है खतरा
अशोका गार्डन, अयोध्या बायपास, पिपलानी, कोहेफिजा, शाहजहांनाबाद, करोंद, मिनाल रेसीडेंसी, पटेल नगर, छोला, बैरागढ़, लालघाटी-हलालपुर रोड, रेलवे स्टेशन, आईएसबीटी और न्यू मार्केट के आसपास रात के समय कुत्तों के झुंड सबसे ज्यादा दिखाई देते हैं। कई जगह फुटपाथों पर कुत्तों के डेरों के कारण पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है। पिछले कुछ वर्षों में शहर में कई बड़े डॉग अटैक के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें मासूम बच्चों की मौत तक हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद भी लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
विशेषज्ञ बोले-नए शेल्टर और एबीसी सेंटर से मिलेगी राहत
स्टेट कोऑर्डिनेटर एबीसी सेंटर डॉ. पीपी सिंह का कहना है कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या अचानक नहीं बढ़ी है। मेटिंग सीजन और भोजन की तलाश के दौरान कुत्ते झुंड बनाकर घूमते हैं, इसलिए उनकी संख्या अधिक दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नए शेल्टर होम और अतिरिक्त एबीसी सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। अगले पांच से छह महीनों में इसका सकारात्मक असर दिखेगा। साथ ही 7 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े मामले की सुनवाई के बाद मिलने वाले दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।












