SIR से बंगाल टूटा :ममता बोलीं- प्रक्रिया के कारण कई लोगों की मौत, अमानवीय व्यवहार के खिलाफ कोर्ट जाएंगे

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बिना किसी वैध कारण के मतदाता सूची से मनमाने ढंग से नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले की जाने वाली एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया को लोगों को डराने और दबाव में लाने का माध्यम बना दिया गया है। 
ममता बोलीं- प्रक्रिया के कारण कई लोगों की मौत, अमानवीय व्यवहार के खिलाफ कोर्ट जाएंगे
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को भाजपा पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा किसी भी धर्म में विश्वास नहीं करती, बल्कि केवल झूठ फैलाने की राजनीति करती है। ममता यह बयान दक्षिण 24 परगना जिले के सागर द्वीप में आयोजित रैली के दौरान दे रही थीं।

    रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान गंभीर रूप से बीमार और बुजुर्ग लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई ऐसे लोग, जो चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं, उन्हें अपनी पहचान साबित करने के लिए मतदान केंद्रों पर लंबी कतारों में खड़ा किया गया।

    ममता- SIR के दौरान लोगों के साथ अमानवीय बर्ताव

    ममता ने ऐलान किया कि SIR के दौरान लोगों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार और कथित मौतों के खिलाफ मंगलवार को अदालत में याचिका दायर की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा मामला है। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई अपने बूढ़े माता-पिता को पहचान साबित करने के लिए लाइन में खड़ा कर दे, तो भाजपा नेताओं को कैसा लगेगा। उन्होंने इसे संवेदनहीनता की पराकाष्ठा बताया।

    प्रक्रिया ने लोगों में डर बढ़ाया- ममता

    ममता बनर्जी ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद डर और तनाव के कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों के नाम मनमाने ढंग से वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं, जिससे आम जनता में भय का माहौल बन गया है। 

    इतना ही नही सीएम ने आगे कहा कि SIR से जुड़े भय, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी के चलते यह स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने साफ कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वह सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगी और एक आम नागरिक के रूप में इस अमानवीय प्रक्रिया के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगी। ममता ने यह भी जोड़ा कि वह एक प्रशिक्षित वकील हैं और इस मुद्दे को कानूनी रूप से मजबूती से उठाएंगी।

    बंगाल में मनमाने ढंग से नाम हटाए जा रहे

    ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बिना किसी वैध कारण के मतदाता सूची से मनमाने ढंग से नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले की जाने वाली एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया को लोगों को डराने और दबाव में लाने का माध्यम बना दिया गया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि गंभीर रूप से बीमार और बुजुर्ग नागरिकों को भी अपनी वैधता साबित करने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। ममता के मुताबिक, यह प्रक्रिया न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर भी सीधा हमला है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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