सरकारी दावों की खुली पोल! श्मशान घाट नहीं, बारिश में चिता जलाने को मजबूर ग्रामीण

बेगमगंज। सरकार गांवों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करती है, लेकिन कई जगह जमीनी हकीकत इन दावों से अलग नजर आती है। जनपद पंचायत बेगमगंज के कई गांवों में आज भी श्मशान घाट की सुविधा नहीं है। इसके चलते ग्रामीणों को बारिश के मौसम में भी खुले में अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
पिपलिया खुर्द में बारिश के बीच अंतिम संस्कार
ऐसा ही मामला ग्राम पंचायत शाहपुर सुल्तानपुर के ग्राम पिपलिया खुर्द से सामने आया। यहां इन्दुर सिंह की पत्नी काशीबाई का निधन हो गया। अंतिम संस्कार के दौरान तेज बारिश होने के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

बारिश से बचने के लिए छाता और तिरपाल का सहारा लेना पड़ा। वहीं, लकड़ियां गीली होने के कारण चिता जलाने में भी दिक्कत आई। आग जलाने के लिए पेट्रोल और टायर तक का इस्तेमाल करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने गांव में श्मशान घाट की जरूरत और पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वर्षों से स्वीकृत, फिर भी नहीं बना श्मशान
ग्रामीण गजराज यादव ने बताया कि गांव में श्मशान घाट वर्षों पहले स्वीकृत हो चुका है, लेकिन अब तक इसका निर्माण नहीं हो पाया है। उनका आरोप है कि पंचायत की उदासीनता के कारण ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए परेशान होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की योजनाएं और निर्देश निचले स्तर तक पहुंचते-पहुंचते बेअसर हो जाते हैं। यदि गांव में श्मशान घाट की सुविधा होती तो बारिश के बीच इस तरह अंतिम संस्कार करने की नौबत नहीं आती।
जनपद सीईओ ने दिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश
मामले को लेकर जनपद पंचायत बेगमगंज के सीईओ मोगराज मीणा ने कहा कि उन्हें यहां पदभार संभाले अभी 10-15 दिन ही हुए हैं। उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में लाया गया है और इसे तत्काल दिखवाया जाएगा।
सीईओ ने कहा कि सभी ग्राम पंचायतों से श्मशान घाट की स्थिति की जानकारी ली जाएगी और आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सभी जगह श्मशान घाट की सुविधा उपलब्ध कराना पंचायत की जिम्मेदारी है।












