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10 नंबर मार्केट का फुटपाथ कहां गया? रहवासियों ने थाने में दी शिकायत, अतिक्रमण और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग

भोपाल की अरेरा कॉलोनी के 10 नंबर मार्केट में फुटपाथ पर कथित अतिक्रमण का मामला अब थाने तक पहुंच गया है। रहवासियों ने हबीबगंज थाने में शिकायत देकर आरोप लगाया है कि सरकारी पैसे से बनाया गया फुटपाथ धीरे-धीरे पार्किंग, निजी इस्तेमाल और व्यावसायिक गतिविधियों की चपेट में आ गया है।
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10 नंबर मार्केट का फुटपाथ कहां गया? रहवासियों ने थाने में दी शिकायत, अतिक्रमण और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
भोपाल की अरेरा कॉलोनी के 10 नंबर मार्केट में फुटपाथ पर अतिक्रमण

भोपाल की अरेरा कॉलोनी स्थित 10 नंबर मार्केट में फुटपाथ पर कथित अतिक्रमण का मामला अब पुलिस तक पहुंच गया है। स्थानीय रहवासियों ने हबीबगंज थाने में शिकायत देकर फुटपाथ पर किए गए कथित कब्जों की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। रहवासियों का आरोप है कि जिस फुटपाथ का निर्माण सरकारी पैसे से आम लोगों के पैदल चलने के लिए कराया गया था, वह धीरे-धीरे पार्किंग, निजी इस्तेमाल और व्यावसायिक गतिविधियों की चपेट में आ गया। स्थिति यह है कि कई जगह पैदल चलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है और लोगों को मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ रहा है।

रहवासियों का सवाल- आखिर फुटपाथ गायब कैसे हो गया?

अरेरा कॉलोनी निवासी विवेक त्रिपाठी और लवनीश भाटी ने हबीबगंज थाने में शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की है। रहवासियों का कहना है कि 10 नंबर मार्केट और उसके आसपास की सड़कों पर फुटपाथ धीरे-धीरे अपनी मूल स्थिति खोता गया। कहीं वाहन खड़े किए जाने लगे तो कहीं निजी सामान रखने और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जगह का इस्तेमाल होने लगा।

उनका सवाल है कि अगर सरकारी जमीन पर फुटपाथ मौजूद था तो वहां लंबे समय तक कब्जे कैसे होते रहे? संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? रहवासियों ने कहा कि सार्वजनिक जमीन और पैदल चलने वालों के लिए बनाई गई जगह को निजी उपयोग में लेना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। अगर जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो उसे हटाकर फुटपाथ को दोबारा आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

‘फुटपाथ खुद नहीं भागा, किसी ने भगाया है’

रहवासियों ने इस पूरे मामले को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि फुटपाथ अपने आप गायब नहीं हो सकता। उनका आरोप है कि समय के साथ अलग-अलग जगहों पर कब्जे होते गए और सरकारी जमीन का इस्तेमाल निजी कामों के लिए किया जाने लगा। विवेक त्रिपाठी का कहना है कि यदि किसी भवन मालिक, व्यावसायिक प्रतिष्ठान या अन्य व्यक्ति ने सरकारी फुटपाथ पर कब्जा किया है तो इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस जमीन की निगरानी और सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है, वहां लंबे समय तक कब्जा कैसे बना रहा? हालांकि, रहवासियों की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस और संबंधित विभागों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग

रहवासियों ने अपनी शिकायत में केवल कथित अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं की है। उन्होंने संबंधित सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि सरकारी जमीन पर लंबे समय तक अतिक्रमण बना रहा तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि निगरानी व्यवस्था कहां कमजोर रही।

उन्होंने नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही, मिलीभगत या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

पुराने नक्शे और सरकारी रिकॉर्ड से खुलेगा राज?

शिकायतकर्ताओं ने मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए पुराने नक्शे और सरकारी रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अरेरा कॉलोनी और 10 नंबर मार्केट के पुराने रिकॉर्ड निकाले जाएं। इनमें यह देखा जाए कि किन जगहों पर फुटपाथ के लिए जमीन निर्धारित की गई थी। इसके बाद सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज स्थिति की मौके पर मौजूद स्थिति से तुलना कराई जाए। अगर रिकॉर्ड में फुटपाथ दर्ज है और मौके पर उसकी जगह पार्किंग, दुकान का सामान, निजी निर्माण या अन्य गतिविधियां दिखाई देती हैं तो पूरे मामले की जांच की जानी चाहिए।

पैदल चलने वालों के सामने बढ़ी परेशानी

फुटपाथ का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों को सुरक्षित तरीके से पैदल चलने की जगह देना होता है। लेकिन रहवासियों का कहना है कि अतिक्रमण के कारण यही उद्देश्य खत्म होता दिखाई दे रहा है। 10 नंबर मार्केट में बड़ी संख्या में लोग खरीदारी और दूसरे कामों के लिए आते-जाते हैं। ऐसे में अगर फुटपाथ पर वाहन खड़े हों या निजी और व्यावसायिक गतिविधियां चलें तो पैदल चलने वालों को सड़क का इस्तेमाल करना पड़ता है।

पार्किंग और निजी इस्तेमाल पर भी उठे सवाल

शिकायत में फुटपाथ के इस्तेमाल को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रहवासियों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर फुटपाथ का इस्तेमाल पार्किंग के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा कुछ जगहों पर निजी उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी फुटपाथ की जगह का इस्तेमाल होने का आरोप है। अगर ऐसा है तो इससे न सिर्फ पैदल चलने वालों की सुविधा प्रभावित होती है, बल्कि सड़क पर यातायात का दबाव भी बढ़ सकता है।

‘सरकारी जमीन को निजी कब्जे से बचाना जरूरी’

विवेक त्रिपाठी और लवनीश भाटी का कहना है कि यह सिर्फ फुटपाथ का मुद्दा नहीं है। यह सरकारी संपत्ति और सार्वजनिक सुविधा से जुड़ा मामला है। उनका कहना है कि फुटपाथ जनता की सुविधा के लिए बनाए जाते हैं। यदि इन्हें धीरे-धीरे निजी इस्तेमाल में दे दिया जाए तो आम लोगों का अधिकार खत्म हो जाता है।

फुटपाथ को मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग

रहवासियों ने मांग की है कि अरेरा कॉलोनी और 10 नंबर मार्केट में फुटपाथ की पूरी स्थिति का सर्वे कराया जाए। सरकारी रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान करने के बाद जहां भी अतिक्रमण मिले, उसे हटाया जाए। इसके साथ ही फुटपाथ को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग की गई है, ताकि लोग सुरक्षित तरीके से पैदल चल सकें।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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