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मामी ने कहा...एग्रेसिव है भांजी नहीं कर पा रही परिवार में एडजस्ट, शेल्टर होम में रखने की गुजारिश

एक 13 वर्षीय बच्ची को शेल्टर होम में रखवाने के लिए उसकी मामी ने चाइल्ड हेल्पलाइन पर कॉल कर मदद मांगी। बच्ची की मां के अचानक घर छोड़कर गायब हो जाने के बाद पिता ने आत्महत्या कर ली थी।
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एग्रेसिव है भांजी नहीं कर पा रही परिवार में एडजस्ट, शेल्टर होम में रखने की गुजारिश
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। एक महिला ने भांजी को शेल्टर होम में रखने की गुहार लगाई है। महिला (मामी) ने कहा कि बच्ची बहुत ज्यादा एग्रेसिव है और इसका असर अब उसके खुद के बच्चों पर पड़ने लगा है। इसलिए मजबूरी में उन्हें बच्ची को सौंपना पड़ रहा है। वहीं किशोरी के मामा ने भी कहा कि वह भांजी की हर जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हैं, लेकिन भांजी किसी भी तरह उनके परिवार के साथ सामंजस्य बैठाने के लिए तैयार नहीं है। इसलिए वह चाहते हैं कि किशोरी को भले कुछ समय लेकिन शेल्टर होम में रखकर उसकी मानसिक तौर पर सहायता की जाए ताकि बच्ची का एग्रेशन कुछ कम हो सके।

    मां डेढ़ साल से लापता 

    जानकारी के मुताबिक किशोरी की मां डेढ़ साल पहले अचानक घर छोड़कर गायब हो गई थी। इसके बाद पिता धीरे-धीरे डिप्रेशन में आने लगे। करीब 7 माह पहले उन्होंने सुसाइड कर लिया। इसके बाद किशोरी के मामा-मामी उसे अपने साथ भोपाल ले आए। किशोरी उसी वक्त से चुपचाप रहती थी। भोपाल आने के बाद यहां भी वह गुमसुम ही रही। मामा ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। उनका परिवार भांजी से पहले से अटैच है। भांजी भी उनके परिवार में घुली-मिली थी, लेकिन तीन साल से जब से उसके मम्मी-पापा में झगड़े होने लगे थे, वह भी तनाव का शिकार थी। मामी ने कहा कि अब वह इतनी एग्रेसिव है कि हाथ में जो चीज आती है, उठाकर मार देती है।

    कम नहीं हो पा रहा एग्रेशन

    बच्ची की मामी का छोटा बेटा 15 साल का है और बड़ा 18 का हो चुका है। वो भी बहन की स्थिति समझते हैं और इसलिए उसे सपोर्ट करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उसका एग्रेशन किसी तरह कम नहीं हो पा रहा। इसके चलते उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वह बच्ची को कैसे हैंडल करें। मामा-मामी ने कहा कि भांजी के जरिए उनका बेटी का चाव पूरा हो गया था, लेकिन किशोरी कभी भी भाइयों को मारने-पीटने लगती है। यही नहीं उन्हें हमेशा यह डर भी बना रहता है कि कहीं बच्ची खुद के साथ कुछ गलत ना कर ले। इसके कारण उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन पर संपर्क का मन बनाया। मामले में किशोरी की काउंसलिंग शुरू की गई है, इसके बाद समिति आगे किशोरी को शेल्टर होम में रखने पर निर्णय लेगी।

    काउंसलिंग से संभव है बदलाव 

    अचानक जीवन में घटी परिस्थितियों के चलते किशोरी के व्यवहार में गुस्सा और चिड़चिड़ापन आ गया है। उसके मन से अतीत की कड़वी यादों को निकालना और उसे सामान्य जीवन में लाना आवश्यक है। यह बदलाव काउंसलिंग से पूरी तरह संभव है।

    दिव्या दुबे मिश्रा, काउंसलर 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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