एथलीट नीरज यादव ने किया सुसाइड! एशियन पैरा गेम्स में जीते थे 3 गोल्ड, कोच एस. सत्यनारायण ने की पुष्टि; जांच जारी

भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए यह बेहद दुखद खबर है। एशियन पैरा गेम्स में तीन गोल्ड मेडल जीतने वाले अनुभवी एथलीट नीरज यादव का 42 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनकी मौत आत्महत्या से हुई बताई जा रही है। खबर सामने आते ही खिलाड़ियों, कोचों और खेल प्रेमियों में गहरा शोक है। हालांकि, उनकी मौत के सही कारणों और परिस्थितियों की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
कोच ने की निधन की पुष्टि
भारतीय पैरा एथलेटिक्स टीम के हेड कोच एस. सत्यनारायण ने नीरज के निधन की पुष्टि की। रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना नीरज के घर पर हुई। 28 अक्टूबर को दिल्ली के एक अस्पताल में उनके शव का पोस्टमार्टम किया जा रहा था। कोच ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि वे इस कदम की सटीक वजह के बारे में कुछ नहीं कह सकते। उन्होंने यह भी कहा कि खिलाड़ियों को करियर के उतार-चढ़ाव का सामना धैर्य के साथ करना चाहिए।
डोपिंग प्रतिबंध की चर्चा
बताया जा रहा है कि नीरज पर डोपिंग प्रतिबंध लगा हुआ था, जिसकी वजह से वे इस महीने हुए एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा नहीं ले सके। कुछ रिपोर्टों में इसे उनकी मानसिक स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।
एशियन पैरा गेम्स में देश का नाम रोशन किया
नीरज यादव भारत के सफल पैरा एथलीटों में गिने जाते थे। साल 2018 में जकार्ता में हुए एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने भाला फेंक स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद 2023 में चीन के हांगझोऊ में हुए एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने भाला फेंक और चक्का फेंक, दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस तरह एशियन पैरा गेम्स में उनके नाम कुल तीन गोल्ड मेडल दर्ज थे।
F55 कैटेगरी क्या होती है?
नीरज F55 कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करते थे। पैरा खेलों में खिलाड़ियों को उनकी शारीरिक क्षमता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है, ताकि मुकाबला बराबरी का रहे। F55 में बैठकर खेले जाने वाले फील्ड इवेंट आते हैं, जिनमें शॉट पुट, डिस्कस थ्रो और जैवलिन थ्रो प्रमुख हैं।
खिलाड़ियों की मानसिक सेहत पर उठा सवाल
यह घटना खेल जगत में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे की ओर ध्यान दिलाती है। खिलाड़ी मैदान पर मजबूत दिखते हैं, लेकिन उन पर प्रदर्शन, प्रतिबंध, चोट और करियर की अनिश्चितता का भारी दबाव रहता है। पैरा एथलीटों के सामने चुनौतियां और भी ज्यादा होती हैं। इसलिए खिलाड़ियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता आसानी से उपलब्ध होना जरूरी है। साथ ही, मदद मांगने को कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी माना जाना चाहिए।
अब आगे क्या?
अब सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पर है, जिससे मौत की परिस्थितियां साफ होंगी।



















