बंगाल चुनाव से पहले ‘सियासी ब्रेकअप’ :ओवैसी ने हुमायूं कबीर की पार्टी से तोड़ा गठबंधन, अकेले चुनाव लड़ेगी AIMIM

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासत ने बड़ा मोड़ ले लिया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अचानक बड़ा फैसला लेते हुए आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है। यह गठबंधन महज कुछ दिन पहले ही बना था, लेकिन एक विवादित बयान और वायरल वीडियो ने पूरी राजनीतिक तस्वीर बदल दी। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने साफ कर दिया है कि, उनकी पार्टी अब पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी और भविष्य में किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, AIMIM और हुमायूं कबीर की पार्टी AJUP ने 25 मार्च को साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। इस गठबंधन को बंगाल की राजनीति में एक नए समीकरण के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन अचानक हालात बदल गए, जब हुमायूं कबीर का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में उनके कुछ ऐसे बयान सामने आए, जिन्होंने राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया।
AIMIM का बड़ा ऐलान
AIMIM ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए गठबंधन खत्म करने की घोषणा की। पार्टी ने कहा कि, वह किसी भी ऐसे बयान से खुद को नहीं जोड़ सकती जिसमें मुसलमानों की निष्ठा या ईमानदारी पर सवाल उठाए जाएं। बंगाल के मुसलमान पहले से ही गरीब और उपेक्षित हैं। ऐसे में उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले बयान स्वीकार नहीं किए जा सकते।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि, हम हाशिए पर मौजूद समुदायों को स्वतंत्र राजनीतिक आवाज देने के लिए चुनाव लड़ते हैं, और इसी सिद्धांत के तहत हमने यह फैसला लिया है।
वायरल वीडियो से मचा बवाल
विवाद की जड़ में एक वायरल वीडियो है, जिसे तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सार्वजनिक किया। इस वीडियो में कथित तौर पर हुमायूं कबीर कहते हुए नजर आए-
- मुस्लिम वोटरों को प्रभावित करना आसान है।
- चुनाव में बड़ी रकम (करीब 1000 करोड़ रुपए) की जरूरत होगी।
- भाजपा नेताओं से संपर्क होने के संकेत।
वीडियो में यह भी दावा किया गया कि, उनकी रणनीति अल्पसंख्यक वोटों को एक दिशा में मोड़ने की है, जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
हुमायूं कबीर की सफाई
हालांकि, हुमायूं कबीर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि, वायरल हो रहा वीडियो पूरी तरह फर्जी और AI-जनरेटेड है। उन्होंने कहा कि, साल 2019 के बाद उनका किसी भी भाजपा नेता से कोई संपर्क नहीं रहा है और उनके खिलाफ लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार हैं।
कबीर ने यह भी आरोप लगाया कि, तृणमूल कांग्रेस (TMC) यह सब राजनीति से प्रेरित होकर कर रही है। इतना ही नहीं, उन्होंने ममता बनर्जी और अन्य TMC नेताओं के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराने की भी बात कही है।
तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थे कबीर हुमायूं
कबीर पहले तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थे, लेकिन पार्टी से निकाले जाने के बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी AJUP बनाई। इसके बाद उन्होंने AIMIM के साथ गठबंधन कर बंगाल की राजनीति में नई जगह बनाने की कोशिश की।
दूसरी ओर, AIMIM लंबे समय से बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, खासकर अल्पसंख्यक वोट बैंक के बीच।
चुनावी गणित पर असर
इस गठबंधन के टूटने से पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है।
- AIMIM अब स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी।
- मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो सकता है।
- TMC और भाजपा दोनों के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
- छोटे दलों की भूमिका और अहम हो सकती है।
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चुनाव शेड्यूल
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे-
- 23 अप्रैल
- 29 अप्रैल
जबकि अन्य राज्यों में-
तमिलनाडु: 23 अप्रैल (एक चरण)
असम, केरल, पुडुचेरी: 9 अप्रैल (मतदान पूरा)
नतीजे 4 मई को घोषित होंगे
AIMIM की रणनीति
AIMIM ने साफ किया है कि उसकी राजनीति का मुख्य उद्देश्य है-
- हाशिए पर मौजूद समुदायों को आवाज देना।
- स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाना।
- गठबंधन की बजाय खुद की ताकत पर चुनाव लड़ना।
इस फैसले से साफ है कि, पार्टी अब सोलो स्ट्रैटेजी अपनाने जा रही है।
TMC vs BJP के बीच नया मोड़
इस पूरे विवाद ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच नई बहस को जन्म दे दिया है। TMC का आरोप है कि भाजपा और हुमायूं कबीर के बीच कोई गुप्त समझौता है और इसके जरिए मुस्लिम वोटों को प्रभावित करने की साजिश रची जा रही है। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों पर अब तक सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गरमाया हुआ है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
क्यों टूटा गठबंधन?
गठबंधन टूटने के पीछे कई अहम वजहें सामने आई हैं। सबसे बड़ी वजह हुमायूं कबीर का वह वायरल वीडियो रहा, जिसने पूरे विवाद को जन्म दिया और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। इस वीडियो में कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय को लेकर की गई टिप्पणियों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया, जिससे असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई। पार्टी को लगा कि, ऐसे बयानों से उसकी छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, खासकर तब जब वह खुद को हाशिए पर खड़े समुदायों की आवाज के रूप में पेश करती है।
इसके अलावा, चुनाव से ठीक पहले बढ़ते राजनीतिक दबाव और विरोधियों के हमलों ने भी इस फैसले को प्रभावित किया। इन सभी कारणों को देखते हुए AIMIM ने गठबंधन से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लिया।











