देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसराइल यात्रा पर अरबी मीडिया खूब चर्चा कर रहा है। लगातार वहां के विश्लेषक अपनी टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने अपनी बातों में इस यात्रा से संबंधित कई विशेष जिक्र किए हैं। उनका कहना है कि भारत हमेशा से ही टू- नेशन -थ्योरी की बात करता है, साथ ही फलिस्तिनी क्षेत्र में शांति बनी रहे इसका भी समर्थन करता है लेकिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश इसराइल के करीब जा रहा है। अरबी मीडिया का ऐसा मानना है कि भारत मौजूदा समय में इसराइल और फिलीस्तिन के जो पहले के संबंध हैं उनको अलग दिशा में ले जाने की कोशिश भी कर रहा है।
पहले भारत की विदेश नीति इसराइल और फलिस्तीन दोनों की महत्वाकांक्षा से दूरी बनाए रखने में यकीन रखता थी, लेकिन आज के मौजूदा समय में भारत की विदेश नीति की मुख्य बिंदु हित आधारित है।
अरब मीडिया का ऐसा मानना है कि भारत वर्तमान समय में अपने पड़ोसियों से तनावपूर्ण रिश्तों से जूझ रहा है। जिस वजह से उसे लगातार सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखना पड़ रहा है। यही वजह है कि देश इसराइल से अपने संबंध बढ़ाने के लिए के लगातार कोशिश कर रहा है।
अरब मीडिया ना सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा पर चर्चा कर रही बल्कि इसराइल पर लगे नरसंहार के पीछे की असल वजह को हाइलाइट करने की कोशिश कर रही है। मीडिया ने गजा-इसराइल नरसंहार पर चर्चा करते हुए भारत के विपक्षी नेताओं की टिप्पणियों को भी अपने कवरेज में शामिल किया है, जिनमें इसराइल पर लगे आरोपों के मद्देनज़र नरेंद्र मोदी की यात्रा का लगातार विरोध किया जा रहा है।
अपने दो दिवसीय इसराइल दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसराइल पर 7 अक्तूबर 2023 को हुए हमास के हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि भारत इस बर्बर आतंकी हमले में मारे गए सभी लोगों के प्रति शोकाकुल है। साथ इस हमले में पीड़ित लोगों के साथ हर तरह से खड़ा है। उनका मानना है कि भारत और इसराइल में वाकई कई समानताएं हैं, यही वजह है कि दोनों देश आपसी सहयोग के लिए पूरी तरह से तैयार खड़े हैं। भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पहल, ग़ज़ा पीस इनीशिएटिव्स का पूर्ण समर्थन करता है। इस पहल से निसंदेह ही क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी और साथ ही फ़लस्तीन के मसले भी सुलझते चले जाएंगे।