अमेरिका ने WHO से खुद को किया अलग :जिनेवा हेडक्वार्टर से हटाया झंडा, इस फैसले का दुनिया पर क्या होगा असर?

अमेरिका ने आधिकारिक रूप से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से खुद को अलग कर लिया। जिनेवा में संगठन के मुख्यालय के बाहर से भी अमेरिकी झंडा अब हट गया है। अमेरिका अब संगठन में दोबारा शामिल नहीं होगा और सीधे देशों के साथ रोग निगरानी एवं स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर काम करेगा।
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जिनेवा हेडक्वार्टर से हटाया झंडा, इस फैसले का दुनिया पर क्या होगा असर?
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका ने 22 जनवरी को आधिकारिक रूप से वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) से खुद को अलग कर लिया। अमेरिकी स्वास्थ्य और विदेश विभाग ने एक बयान जारी कर पुष्टि की है कि, अमेरिका अब WHO का सदस्य नहीं है। जिनेवा स्थित WHO मुख्यालय से अमेरिका का झंडा भी हटा दिया गया। अमेरिका ने कहा है कि, वह सीमित स्तर पर ही संगठन के साथ सहयोग करेगा, ताकि अलग होने की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

    अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि, अमेरिका WHO में दोबारा शामिल होने की कोई योजना नहीं बना रहा है। इसके बजाय, अमेरिका अब देशों के साथ सीधे संपर्क करके रोग निगरानी और अन्य स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर काम करेगा।

    कोविड-19 और ट्रंप प्रशासन का रुख

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में राष्ट्रपति बनने के पहले दिन ही WHO से बाहर होने का निर्णय लिया था। अमेरिकी अधिकारी बताते हैं कि, यह कदम WHO की कोविड-19 महामारी के प्रबंधन में विफलताओं के कारण उठाया गया। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि, संगठन ने बीमारियों को रोकने, प्रबंधित करने और जानकारी साझा करने में अपेक्षित भूमिका नहीं निभाई।

    WHO पर बकाया और भुगतान विवाद

    WHO के अनुसार, अमेरिका पर लगभग 26 करोड़ डॉलर (करीब 2380 करोड़ रुपए) का बकाया है। अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि, अमेरिकी जनता ने पहले ही पर्याप्त योगदान दे दिया है, इसलिए अब कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाएगा।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि, अमेरिकी कानून के अनुसार किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन से बाहर निकलने के लिए एक साल पहले नोटिस देना और सभी बकाया का भुगतान करना आवश्यक है। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के ग्लोबल हेल्थ लॉ विशेषज्ञ लॉरेंस गोस्टिन के अनुसार, अमेरिका का यह कदम स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन है, लेकिन ट्रंप प्रशासन शायद इसे बचा सकता है।

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    अमेरिकी फंडिंग और संसाधनों पर रोक

    अमेरिका ने WHO को दी जाने वाली सभी सरकारी फंडिंग समाप्त कर दी है। अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग (HHS) ने कहा कि, राष्ट्रपति ट्रंप ने भविष्य में किसी भी संसाधन या वित्तीय सहायता पर रोक लगा दी है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि, अमेरिका WHO का सबसे बड़ा आर्थिक सहयोगी था, जो संगठन के कुल बजट का करीब 18 प्रतिशत प्रदान करता था। अमेरिका के बाहर जाने से WHO को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने अपनी मैनेजमेंट टीम आधी कर दी है और कई गतिविधियों में कटौती की है। WHO ने चेतावनी दी है कि, इस साल के मध्य तक उसे कर्मचारियों की संख्या लगभग एक चौथाई तक कम करनी पड़ सकती है।

    वैश्विक स्वास्थ्य पर प्रभाव

    अमेरिका का यह कदम न केवल संगठन पर असर डाल रहा है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि, इससे बीमारियों की पहचान, रोकथाम और उनसे लड़ने की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कमजोर होगी।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के बाहर जाने से WHO पर भरोसा करने वाले वैश्विक हेल्थ सिस्टम में गड़बड़ी आएगी।

    WHO प्रमुख टेड्रोस एडनॉम गेब्रेयेसस ने भी अमेरिका से अपील की थी कि, वह संगठन में दोबारा शामिल हो। उनका कहना था कि, अमेरिका के बाहर जाने से दुनिया और अमेरिका दोनों को नुकसान होगा।

    बिल गेट्स का रुख और फंडिंग का महत्व

    दावोस में बातचीत में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के प्रमुख बिल गेट्स ने कहा कि, अमेरिका शायद जल्दी WHO में वापस नहीं आएगा, लेकिन वह इसके लिए आवाज उठाते रहेंगे। WHO को सदस्य देशों और निजी संस्थाओं से फंडिंग मिलती है। अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा दाता बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन है। अन्य प्रमुख फंड देने वाले देश जर्मनी और ब्रिटेन हैं।

    आगामी कार्यकारी बोर्ड बैठक और भविष्य

    WHO ने कहा है कि, फरवरी में होने वाली कार्यकारी बोर्ड की बैठक में अमेरिका के बाहर जाने और इसके असर पर चर्चा होगी। पिछले एक साल से WHO अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहा था, लेकिन भविष्य में सहयोग अस्पष्ट है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि, इस कदम से वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा खतरे में आ सकती है।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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