मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों पर खुलकर नाराजगी जताई है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित करने के लिए कई देशों से वॉरशिप भेजने की अपील की थी, लेकिन ज्यादातर सहयोगियों ने इससे साफ इनकार कर दिया। जिसके बाद उनका बयान फिर आग पकड़ रहा है।
US आर्मी दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना- ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को किसी की जरूरत नहीं है और उसकी सेना दुनिया की सबसे ताकतवर है। उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने करीब सात देशों से बातचीत की, लेकिन जर्मनी, स्पेन और इटली जैसे देशों ने साफ तौर पर मना कर दिया। ब्रिटेन ने भी शुरुआत में मदद देने से इनकार किया और बाद में युद्ध खत्म होने के बाद सहयोग की पेशकश की, जिसे ट्रम्प ने ठुकरा दिया।
NATO को चेतावनी- 'भविष्य' खतरे में पड़ सकता है!
सहयोगी देशों के रवैये से नाराज ट्रंप ने नाटो पर भी निशाना साधा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सदस्य देश ऐसे समय में साथ नहीं देंगे, तो नाटो का भविष्य “बहुत बुरा” हो सकता है। ट्रंप का कहना है कि वह लंबे समय से यह कहते आ रहे हैं कि जरूरत पड़ने पर ये देश साथ नहीं देंगे और अब वही हो रहा है। ऐसे में उनकी कार्रवाई से नाटो देशों को बुरे परिणाम देखने पड़ सकते हैं।
खामेनेई : 200 डॉलर बैरल तक पहुंच सकती है तेल की कीमत
इस बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर डाला है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20% तेल परिवहन के लिए जिम्मेदार है। ईरान की ओर से 15 से ज्यादा जहाजों पर हमले किए जा चुके हैं, जिससे इस रास्ते से गुजरने वाले टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। जिससे ईरान पर क्रूड ऑयल के लिए निर्भर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है।
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने साफ कहा है कि यह रास्ता फिलहाल बंद ही रहेगा। साथ ही चेतावनी दी गई है कि हालात ऐसे ही रहे तो तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
युद्ध जल्द खत्म होने का दावा कर चुके ट्रंप
जंग की अवधि को लेकर भी अब अनिश्चितता बनी हुई है। जहां ट्रंप पहले दावा कर चुके थे कि यह लड़ाई जल्द खत्म होगा, लेकिन अब उनके बयान बदलते नजर आ रहे हैं। उन्होंने संकेत दिए हैं कि अमेरिका अकेले अपनी नौसेना के जरिए जहाजों को सुरक्षा देगा, जबकि अन्य देशों की भागीदारी को लेकर उत्साह कम है।
जंग की आग अब तक नहीं थमी
गौरतलब है कि यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान पर बड़ा हमला किया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे यह जंग पूरे मिडिल ईस्ट में फैल गई और अब इसके जल्द खत्म होने के आसार कम नजर आ रहे हैं।











