नई दिल्ली/अहमदाबाद। किसी भी बड़े हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर हादसा क्यों हुआ? लेकिन अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया विमान हादसे के पीड़ित परिवारों के लिए यह सवाल अब दर्द से भी बड़ा हो चुका है। करीब 10 महीने बीत जाने के बाद भी हादसे की पूरी सच्चाई सामने नहीं आ पाई है।
इसी वजह से अब करीब 30 पीड़ित परिवारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) का डेटा सार्वजनिक करने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि, उन्हें मुआवजा या पैसे नहीं चाहिए, बल्कि वे जानना चाहते हैं कि आखिर वह कौन सी वजह थी जिसने एक ही पल में 260 लोगों की जिंदगी खत्म कर दी।
पीड़ित परिवारों ने अपने पत्र में भावुक शब्दों में लिखा कि हादसे के बाद सरकार और एअरलाइन की ओर से आर्थिक सहायता जरूर दी गई, लेकिन इससे उनका दर्द कम नहीं हुआ। परिजनों का कहना है कि अगर ब्लैक बॉक्स का डेटा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो कम से कम इसे निजी तौर पर पीड़ित परिवारों के साथ साझा किया जाए, ताकि उन्हें यह समझने में मदद मिल सके कि हादसे के अंतिम पलों में आखिर क्या हुआ था।
हादसे में अपने 24 साल के बेटे को खोने वाले निलेश पुरोहित ने कहा कि, मेरा घर अब बिल्कुल खाली लगने लगा है। कोई भी मुआवजा इस कमी को पूरा नहीं कर सकता। हमें बस यह जानना है कि आखिर उस दिन क्या हुआ था।

यह दर्दनाक हादसा 12 जून 2025 को हुआ था। एअर इंडिया की फ्लाइट AI-171, जो अहमदाबाद से लंदन जा रही थी, टेकऑफ के कुछ ही मिनट बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। यह बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान शहर के एक मेडिकल कॉलेज हॉस्टल परिसर में जा गिरा था।
हादसे के बाद विमान में आग लग गई और देखते ही देखते पूरा इलाका मलबे में बदल गया। इस दुर्घटना में विमान में सवार 241 यात्रियों और क्रू मेंबर की मौत हो गई। जमीन पर मौजूद 19 लोगों की भी जान चली गई। इस तरह कुल 260 लोगों की मौत हुई थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
परिजनों का मानना है कि, हादसे की असली वजह जानने का सबसे अहम जरिया ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) ही हैं। ब्लैक बॉक्स में विमान की उड़ान से जुड़ी सभी तकनीकी जानकारी रिकॉर्ड होती है, जबकि CVR में पायलट और को-पायलट के बीच हुई बातचीत और कॉकपिट की आवाजें रिकॉर्ड रहती हैं।
परिवारों का कहना है कि इन दोनों रिकॉर्डिंग से यह पता चल सकता है कि, क्या विमान में कोई तकनीकी खराबी थी, क्या उड़ान के दौरान कोई आपात स्थिति बनी थी या फिर कोई मानवीय गलती हुई थी।
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पीड़ित परिवारों ने यह पत्र सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही नहीं भेजा है, बल्कि इसकी प्रतियां कई अन्य अधिकारियों को भी भेजी गई हैं।
इनमें शामिल हैं-
परिवारों का कहना है कि, वे इस मामले में पूरी पारदर्शिता चाहते हैं, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
पीड़ित परिवारों ने अपने पत्र में एअर इंडिया द्वारा बनाई गई वेबसाइट को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। यह वेबसाइट हादसे में मिले सामान की पहचान कराने के लिए बनाई गई है। लेकिन कई परिवारों का कहना है कि इसे इस्तेमाल करना बेहद मुश्किल है।
हादसे में अपनी मां को खोने वाली किंजल पटेल ने बताया कि वेबसाइट पर 25,000 से ज्यादा सामानों की लिस्ट है, लेकिन उनकी तस्वीरें साफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि, तस्वीरें इतनी धुंधली हैं कि किसी भी सामान को पहचानना लगभग नामुमकिन है।
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कई परिवारों ने यह भी कहा कि, डिजिटल सिस्टम की वजह से ग्रामीण इलाकों के लोगों को काफी परेशानी हो रही है। हादसे में अपनी मां, भाई और बेटी को खोने वाले खेड़ा के रोमिन वोरा ने बताया कि एअर इंडिया से संपर्क करने का सिर्फ एक तरीका ईमेल है।
उन्होंने कहा कि, ईमेल का जवाब आने में 10 से 15 दिन लग जाते हैं। गांवों में कई लोग ईमेल का इस्तेमाल करना भी नहीं जानते। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि वेबसाइट पर व्यक्तिगत सामान को सार्वजनिक रूप से दिखाना असंवेदनशील है।
इस हादसे के बाद एअरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने जुलाई 2025 में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी की थी। हालांकि, परिवारों का कहना है कि उस रिपोर्ट में कई अहम सवालों के जवाब नहीं मिले। यही वजह है कि अब वे चाहते हैं कि ब्लैक बॉक्स डेटा सामने आए, ताकि पूरी सच्चाई स्पष्ट हो सके।
इस साल 12 फरवरी को एक अंतरराष्ट्रीय अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जांच में हादसे के लिए पायलट की गलती सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया था कि, पायलट ने कथित तौर पर फ्यूल स्विच बंद कर दिया था, जिसके कारण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि, AAIB ने इस रिपोर्ट को गलत बताते हुए कहा कि जांच अभी जारी है और किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। ब्यूरो ने मीडिया से अपील की है कि, अटकलें लगाने से बचा जाए और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जाए।
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अधिकारियों के अनुसार इस विमान हादसे की फाइनल जांच रिपोर्ट जून 2026 तक आने की संभावना है। संभावना है कि यह रिपोर्ट हादसे की पहली बरसी के आसपास सार्वजनिक की जाएगी। लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि इतना लंबा इंतजार उनके लिए बेहद मुश्किल है, क्योंकि हर दिन उन्हें अपने प्रियजनों की याद दिलाता है।
जिस विमान का हादसा हुआ था, वह बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर था, जिसे दुनिया के आधुनिक और सुरक्षित विमानों में गिना जाता है।
इस विमान की प्रमुख विशेषताएं-
लंबाई: 56.70 मीटर
विंगस्पैन: 60 मीटर
ऊंचाई: 16.90 मीटर
इंजन: 2 इंजन
अधिकतम स्पीड: 954 किमी/घंटा
अधिकतम रेंज: 13,620 किमी
सीटिंग क्षमता: 254 यात्री
फ्यूल कैपेसिटी: 1,26,206 लीटर
निर्माता: अमेरिकी कंपनी बोइंग
इस विमान की कीमत करीब 2,180 करोड़ रुपए बताई जाती है।
अहमदाबाद विमान हादसे के पीड़ित परिवारों के लिए यह सिर्फ एक तकनीकी जांच का मामला नहीं है, बल्कि भावनात्मक न्याय की तलाश भी है। वे चाहते हैं कि हादसे की पूरी सच्चाई सामने आए, ताकि उन्हें यह समझने में मदद मिल सके कि उनके अपनों के साथ आखिर हुआ क्या था। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रधानमंत्री और संबंधित एजेंसियां इस मांग पर क्या कदम उठाती हैं। क्योंकि इन परिवारों के लिए सच्चाई ही शायद वह एकमात्र चीज है जो उनके दर्द को थोड़ा कम कर सकती है।