Shivani Gupta
6 Jan 2026
पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। डीजी ISPR लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी के बयान को सोशल मीडिया पर गंभीरता से कम और मजाक के तौर पर ज्यादा देखा जा रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अहमद शरीफ चौधरी भारत को चेतावनी देने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी भाषा औपचारिक सैन्य बयान जैसी नहीं लगी। उन्होंने कहा- 'ले आओ तुम्हें जो करना है, दाएं से आओ, बाएं से आओ, ऊपर से आओ, नीचे से आओ, इकट्ठे आओ या किसी के साथ आओ, अगर मजा न करा दिया तो पैसे वापस।' इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर खिल्ली उड़ाई जा रही है।
इस बयान को लेकर यूजर्स तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग इसे गंभीर सैन्य चेतावनी की बजाय मनोरंजन से जोड़कर देख रहे हैं।
अहमद शरीफ चौधरी ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान ऊपर वाले का तोहफा है और देश में बहुत बरकत है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि देश कैसे प्रतिक्रिया देता है।
डीजी ISPR ने भारत को पाकिस्तान का दुश्मन बताते हुए कहा कि देश की तकदीर नेतृत्व और जनता के हाथ में है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की लीडरशिप इस मुद्दे पर साफ नजरिया रखती है।
आमतौर पर सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीति, रणनीति और तैयारियों की बात होती है। लेकिन इस बार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में औपचारिक सैन्य और कूटनीतिक भाषा की जगह तंज और व्यंग्य भरी भाषा सुनने को मिली।
सुरक्षा मामलों से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस तरह की भाषा आत्मविश्वास नहीं, बल्कि असुरक्षा की भावना को दिखाती है।
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अहमद शरीफ चौधरी ने यह भी कहा कि पाकिस्तानी नागरिकों पर कार्रवाई करने का अधिकार सिर्फ पाकिस्तान की रियासत को है। उन्होंने कहा कि अपने संविधान और कानून के तहत ही राज्य अपने नागरिकों को सजा दे सकता है।
यह पहली बार नहीं है जब डीजी ISPR विवादों में आए हों। इससे पहले भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महिला पत्रकार की ओर इशारा करने को लेकर उनकी आलोचना हो चुकी है।