इस पूरे आयोजन में जहां एक ओर आस्था का बड़ा रूप देखने को मिला, वहीं समाज को मदद और सहयोग का संदेश भी दिया गया। धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों से अपील की कि वे जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आएं। आयोजन ने धार्मिक माहौल के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी एहसास कराया।
कथा के चौथे दिन कुल 543 लोगों ने विधि-विधान के साथ सनातन धर्म अपनाया। इस दौरान बेमेतरा के कोदवा निवासी मोहम्मद अनवर अली ने अपने परिवार के साथ धर्म परिवर्तन किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगाजल छिड़ककर उनका शुद्धिकरण किया गया और नया नाम 'आदर्श दास' रखा गया। इस प्रक्रिया में पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया।
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हनुमंत कथा के चौथे दिन लगे दिव्य दरबार में भारी भीड़ देखने को मिली। दावा है कि इस आयोजन में करीब 2 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे। लोग दूर-दराज के इलाकों से यहां पहुंचे और कथा के साथ-साथ दरबार में अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर शामिल हुए। आयोजन स्थल पर भक्तों की भीड़ ने मेले जैसा माहौल बना दिया।
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दरबार के दौरान कई लोगों ने अपनी परेशानियां रखीं, जिनका समाधान पर्चा लिखकर बताया गया। दावा किया गया कि भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित लोगों को राहत दी गई। मंत्रोच्चार के दौरान कुछ लोग असामान्य व्यवहार करते भी नजर आए, जिसमें महिलाएं और पुरुष जमीन पर गिरते और झूमते दिखे। इसे आस्था से जोड़कर देखा गया।
दरबार के बीच एक बुजुर्ग ने अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने की बात कही। इस पर धीरेंद्र शास्त्री ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया और 50 हजार रुपए दिए। साथ ही मौजूद जनप्रतिनिधियों और यजमानों से भी सहयोग की अपील की, जिसके बाद कुल 1 लाख 20 हजार रुपए की सहायता बुजुर्ग को दी गई। यह पहल वहां मौजूद लोगों के लिए प्रेरणादायक बनी।