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Nescod Technology:क्या बिना बिजली 20 मिनट में ठंडा होगा घर? नई कूलिंग तकनीक जो बिना बिजली, घर को कर देगी बिल्कुल ठंडा

नेस्कोड टेक्नोलॉजी को एक नई कूलिंग इनोवेशन है जो बिना पारंपरिक AC और ज्यादा बिजली के घरों को ठंडा रखने का दावा करती है। इसमें रासायनिक प्रक्रिया और प्राकृतिक सिद्धांतों का उपयोग करके तापमान कम करने की बात कही जाती है। यह तकनीक भविष्य में ऊर्जा बचत का एक नया विकल्प बन सकती है, ऐसा विशेषज्ञों का मानना है।
क्या बिना बिजली 20 मिनट में ठंडा होगा घर? नई कूलिंग तकनीक जो बिना बिजली, घर को कर देगी बिल्कुल ठंडा
फाइल फोटो

आज के समय में बढ़ती गर्मी और बढ़ते बिजली बिल लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गए हैं। गर्मी से राहत पाने के लिए ज्यादातर घरों में एयर कंडीशनर का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यह महंगा और बिजली की खपत वाला विकल्प है। इसी बीच एक नई तकनीक को लेकर चर्चा तेज हो गई है जिसे नेस्कोड टेक्नोलॉजी कहा जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह सिस्टम बिना ज्यादा बिजली खर्च किए घर को ठंडा रख सकता है। इसमें रासायनिक प्रक्रिया का उपयोग होता है जो गर्मी को सोखकर ठंडक पैदा करती है और भविष्य की कूलिंग तकनीक मानी जा रही है।

क्या है और कैसे काम करती है ?

नेस्कोड टेक्नोलॉजी को एक उभरती हुई कूलिंग प्रणाली के रूप में बताया जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से अमोनियम नाइट्रेट नामक रसायन का उपयोग किया जाता है, जिसे आमतौर पर खाद बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक में बताया जाता है कि जब इस रसायन को पानी में मिलाया जाता है तो यह एक एंडोथर्मिक प्रक्रिया के जरिए आसपास की गर्मी को सोख लेता है और वातावरण को ठंडा करता है। इसी कारण इसे बिना मोटर और कंप्रेसर के कूलिंग सिस्टम के रूप में देखा जा रहा है।

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तापमान कम करने का दावा और प्रक्रिया

इस तकनीक को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि कुछ ही मिनटों में यह कमरे के तापमान को काफी हद तक कम कर सकती है। बताया जाता है कि रासायनिक मिश्रण के कारण गर्मी ऊर्जा अवशोषित हो जाती है और वातावरण ठंडा महसूस होने लगता है। हालांकि यह प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित और तकनीकी सेटअप पर निर्भर बताई जाती है, जिसमें रसायन और पानी का सही अनुपात जरूरी होता है।

सोलर पावर और दोबारा उपयोग की अवधारणा

इस तकनीक को सोलर एनर्जी के साथ जोड़ा जा सकता है। इसमें पानी को दोबारा भाप बनाकर सिस्टम में उपयोग योग्य बनाया जा सकता है, जिससे रासायनिक प्रक्रिया को फिर से सक्रिय किया जा सके। इस तरह इसे बार बार इस्तेमाल करने योग्य सिस्टम के रूप में देखा जा रहा है।

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पर्यावरण और बिजली बचत का दावा

नेस्कोड टेक्नोलॉजी को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि यह पारंपरिक एयर कंडीशनर की तुलना में कम बिजली खर्च करती है। AC की वजह से दुनिया में बड़ी मात्रा में बिजली खर्च होती है, ऐसे में यह तकनीक ऊर्जा की खपत को कम करने का विकल्प बन सकती है। 

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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