UTU पेपर लीक कांड का असर :उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय ने बदला परीक्षा सिस्टम, अब प्राइवेट कॉलेजों के शिक्षक नहीं बना पाएंगे पेपर

उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) ने हाल ही में सामने आए पेपर लीक प्रकरण के बाद अपनी परीक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ा और कड़ा बदलाव कर दिया है। विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में किसी भी निजी इंजीनियरिंग और प्रोफेशनल कॉलेज के शिक्षक विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में लिए प्रश्नपत्र तैयार नहीं करेंगे। इतना ही नहीं, इन शिक्षकों को यूनिवर्सिटी के किसी भी गोपनीय परीक्षा कार्य से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। यह अहम फैसला हाल ही में हुए उस पेपर लीक मामले के बाद लिया गया है, जिसमें एक प्राइवेट कॉलेज से जुड़े शिक्षक की संदिग्ध भूमिका सामने आई थी। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे, जिसके चलते यूटीयू प्रशासन ने सिस्टम को पूरी तरह दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया है।
क्यों उठाया गया यह कड़ा कदम?
अब तक की व्यवस्था के अनुसार, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय परीक्षाओं के प्रश्नपत्र बनवाने, उनकी मॉडरेशन करने और अन्य गोपनीय कार्यों के लिए निजी कॉलेजों के अनुभवी शिक्षकों की सेवाएं लेता था। हालांकि, हालिया मामले में एक प्राइवेट कॉलेज के शिक्षक का नाम पेपर लीक में आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की आंखें खुल गईं। विश्वविद्यालय का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था में हितों के टकराव (Conflict of Interest) की गुंजाइश बनी रहती है। इसी आशंका और लूपहोल को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए यूटीयू ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य परीक्षा की गोपनीयता को बचाना और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने से रोकना है।
जल्द लागू होगी नई और सख्त व्यवस्था
छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखने और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को फिर से बहाल करने के लिए यूटीयू एक नए और सख्त सिस्टम को अंतिम रूप दे रहा है। कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने जानकारी दी है कि नई व्यवस्था बहुत जल्द धरातल पर उतर जाएगी। इस नई प्रक्रिया के तहत केवल प्रश्नपत्र तैयार करने पर ही रोक नहीं लगेगी, बल्कि पेपर के निर्माण से लेकर उसके वितरण तक के हर एक चरण की गहन समीक्षा की जा रही है।
छात्रों का भरोसा जीतना सबसे बड़ी प्राथमिकता
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन केवल दोषियों के खिलाफ कागजी कार्रवाई करके चुप नहीं बैठने वाला है। उनका विजन पूरी परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और आधुनिक बनाने का है। डॉ. ठाकुर ने कहा कि उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के लाखों छात्र-छात्राओं का अपनी यूनिवर्सिटी की व्यवस्था पर अटूट भरोसा है। इसी भरोसे को कायम रखना विश्वविद्यालय प्रबंधन की सबसे पहली और बड़ी जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य के तहत परीक्षा प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाया जा रहा है ताकि आगे से कोई भी चूक न हो सके।












