Shivani Gupta
2 Jan 2026
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया। विवाद ‘I Love Muhammad’ को लेकर भड़का। जिसमें पथराव, तोड़फोड़ और पुलिस पर फायरिंग की घटनाएं सामने आईं। इस हिंसा के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि, राज्य में अब किसी को कानून को चुनौती देने की इजाजत नहीं है। पुलिस ने इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा को हिरासत में ले लिया है और 39 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
शुक्रवार को मौलाना तौकीर रजा की अपील पर बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने ‘I Love Muhammad’ के समर्थन में नारे लगाए और पुलिस पर पथराव किया। भीड़ ने शहर में तोड़फोड़ की, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। अब तक 10 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, मौलाना भूल गया कि शासन किसका है। कुछ लोग समझते हैं कि, धमकी देकर और जबरदस्ती जाम लगाकर वे कानून को चुनौती दे सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो किसी इलाके में नाकाबंदी होगी और न ही कर्फ्यू। उन्होंने कहा कि इस कड़े सबक से आने वाली पीढ़ियां दंगे करने से पहले सोचेंगी।
पुलिस ने पहले तौकीर रजा को हाउस अरेस्ट किया और देर रात फाइक एन्क्लेव से अज्ञात स्थान पर पूछताछ के लिए ले जाया गया। उनकी और समर्थकों की मोबाइल फोन की जांच जारी है। संभावना जताई जा रही है कि, पुलिस आज उनकी औपचारिक गिरफ्तारी भी कर सकती है।
लखनऊ में 'I Love Buldozer' और 'I Love Shri Yogi Adityanath' के होर्डिंग्स लगवाए गए, जबकि बाराबंकी में ‘I Love Muhammad’ बैनर तोड़ने से हंगामा हुआ। कानपुर से शुरू हुआ यह विवाद अब कई जिलों में फैल चुका है। वाराणसी में भी बिना अनुमति के जुलूस निकालने पर 4 गिरफ्तारियां हुईं।
अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सभी मुस्लिमों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि, पैगंबर-ए-इस्लाम ने दुनिया को शांति का संदेश दिया है, इसलिए किसी को नुकसान पहुंचाना या कानून को अपने हाथ में लेना गलत है।
यह विवाद कानपुर में 4 सितंबर को ईद मिलाद-उन्नबी के जुलूस के दौरान शुरू हुआ। उस समय एक समूह ने जुलूस मार्ग पर ‘I Love Muhammad’ बैनर लगाया, जिसका स्थानीय हिंदू संगठनों ने विरोध किया। इसके बाद कई शहरों में इसी तरह के बैनर, पोस्टर और रैलियां आयोजित की गईं।