
नई दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुल नरवणे ने 2020 में भारत-चीन सीमा गतिरोध को लेकर बड़ा बयान दिया है। गुरुवार को एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उस समय सरकार ने सेना का पूरा समर्थन किया था और हालात से निपटने के लिए भारतीय सेना को पर्याप्त अधिकार दिए गए थे। सेना चीन के खिलाफ किसी भी प्रशेर में नही थी और अपने हथियार का यूज करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र थी।
जनरल नरवणे ने कहा कि लद्दाख में चीन के साथ तनाव के दौरान सेना को फ्री हैंड दिया गया था। उनके मुताबिक, हालात बिगड़ने पर भारतीय सैनिकों को आत्मरक्षा में गोली चलाने तक की अनुमति थी। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश था कि जमीनी स्थिति के अनुसार जो उचित समझो, वह करो।
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उन्होंने बताया कि रेचिन ला और पैंगोंग झील के पास दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने थीं, लेकिन भारतीय सेना ने स्थिति को और बिगड़ने नहीं दिया और अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल किया।
नरवणे ने अपनी किताब फोर स्टॉर्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर चल रहे विवादों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि किताब में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसे लेकर इतना हंगामा किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार को किसी हिस्से पर आपत्ति लगी, तो वह उनका निर्णय है और वह उसका सम्मान करते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि उनकी दूसरी किताब भी पूरी हो चुकी है।
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यह बयान उस राजनीतिक बहस के बाद आया है, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में दावा किया था कि सरकार ने सीमा विवाद के दौरान सेना को अकेला छोड़ दिया था। उन्होंने नरवणे की किताब का हवाला देते हुए यह मुद्दा उठाया था।
पूर्व सेना चीफ जनरल ने सरकार की अग्निपथ योजना पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नई नीतियों पर चर्चा होना सामान्य है, और उन्होंने अपनी राय खुलकर रखी थी, लेकिन अंतिम निर्णय लागू करना सेना का काम होता है।