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थाईलैंड का रेंटल वाइफ ट्रेंड:जहां रिश्तों की नई दुनिया और भारत से आने वाले पर्यटकों की बढ़ती दिलचस्पी

थाईलैंड में रेंटल वाइफ एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें कुछ लोग घूमने आने वाले पर्यटकों के साथ कुछ समय के लिए साथी की तरह रहते हैं। यह कोई शादी नहीं होती, बल्कि एक समझौता होता है। इस बात को लेकर लोगों की अलग - अलग राय है और यह भारत समेत कई देशों के यात्रियों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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जहां रिश्तों की नई दुनिया और भारत से आने वाले पर्यटकों की बढ़ती दिलचस्पी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    थाईलैंड अपनी खूबसूरत समुद्री तटों, नाइटलाइफ और पर्यटन के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में यहां एक अनोखा और विवादित ट्रेंड चर्चा में आया है, जिसे रेंटल वाइफ कहा जाता है। यह कोई कानूनी शादी नहीं बल्कि एक अस्थायी साथी व्यवस्था है, जो खासकर अकेले घूमने आने वाले पर्यटकों के बीच देखने को मिलती है। इस ट्रेंड ने पर्यटन की दुनिया में नई बहस छेड़ दी है और यह भारत समेत कई देशों से आने वाले यात्रियों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

    खूबसूरत देश थाईलैंड और बदलता पर्यटन ट्रेंड

    दक्षिण-पूर्व एशिया का लोकप्रिय पर्यटन देश थाईलैंड अपनी सुंदर समुद्री तटों, नाइटलाइफ और घूमने की शानदार जगहों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां हर साल लाखों विदेशी पर्यटक आते हैं, जिनमें बड़ी संख्या भारत से भी होती है। लेकिन पिछले कुछ समय से इस देश में एक ऐसा अनोखा और विवादित ट्रेंड सामने आया है, जिसे लोग रेंटल वाइफ के नाम से जानते हैं। यह कोई पारंपरिक विवाह नहीं है, बल्कि एक अस्थायी साथी व्यवस्था है जो पर्यटन से जुड़कर विकसित हुई है।

    क्या है ‘रेंटल वाइफ’ की असली परंपरा

    थाईलैंड के कुछ पर्यटन क्षेत्रों में, खासकर पटाया जैसे शहरों में यह व्यवस्था ज्यादा देखने को मिलती है। इसमें कोई महिला किसी विदेशी पर्यटक के साथ तय समय के लिए रहती है और उसकी यात्रा में साथी की भूमिका निभाती है। यह रिश्ता पूरी तरह निजी समझौते पर आधारित होता है, जिसमें दोनों पक्ष पहले ही शर्तें तय कर लेते हैं। यह कोई कानूनी शादी नहीं होती और न ही इसका कोई सरकारी दर्जा होता है। इसे एक तरह की अस्थायी कंपेनियनशिप कहा जा सकता है, जो यात्रा के दौरान अकेलेपन को कम करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

    कैसे काम करता है यह सिस्टम

    इस व्यवस्था में महिला और पर्यटक आपसी सहमति से तय करते हैं कि साथ कितना समय बिताना है। यह समय कुछ घंटों से लेकर कई दिनों या कभी-कभी हफ्तों तक हो सकता है। इस दौरान घूमना, बातचीत करना और यात्रा में साथ देना शामिल होता है। इसे एक प्रकार की सेवा के रूप में देखा जाता है, जो पूरी तरह निजी समझौते पर आधारित होती है। इस ट्रेंड का कोई आधिकारिक नियम नहीं है, इसलिए हर समझौता अलग होता है। इसी वजह से इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं और बहस भी होती रहती हैं।

    पर्यटन और अकेले यात्रियों की भूमिका

    थाईलैंड में पर्यटन उद्योग बहुत मजबूत है और हर साल लाखों लोग यहां घूमने आते हैं। इनमें कई ऐसे पर्यटक होते हैं जो अकेले यात्रा करते हैं और उन्हें सफर में साथी की जरूरत महसूस होती है। इसी मांग के कारण यह ट्रेंड धीरे-धीरे बढ़ने लगा। पर्यटन के बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी कमाई के नए अवसर मिले हैं। कुछ आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं इस व्यवस्था को आय के साधन के रूप में देखती हैं। यही वजह है कि यह ट्रेंड समय के साथ एक अनौपचारिक व्यवसाय का रूप ले चुका है।

    कैसे तय होती हैं खर्च और शर्तें 

    इस व्यवस्था में कोई फिक्स कीमत नहीं होती। हर मामला अलग होता है और खर्च कई बातों पर निर्भर करता है। जैसे समय की अवधि, व्यक्ति की पसंद, बातचीत और आपसी सहमति। इसलिए किसी एक तय रेट की बात करना सही नहीं होता। क्योंकि यह पूरा सिस्टम किसी कानूनी ढांचे के तहत नहीं आता, इसलिए इसमें कोई सरकारी नियम या नियंत्रण भी नहीं है। हर सौदा व्यक्तिगत समझ के आधार पर तय होता है।

    समाज में अलग-अलग राय और चर्चा

    इस ट्रेंड को लेकर समाज में अलग-अलग विचार हैं। कुछ लोग इसे सिर्फ एक सेवा और पर्यटन का हिस्सा मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे नैतिक रूप से सही नहीं मानते। यही कारण है कि यह विषय अक्सर बहस का हिस्सा बन जाता है। थाईलैंड की संस्कृति और पर्यटन मॉडल दोनों ही इस तरह के नए ट्रेंड को प्रभावित करते हैं। जहां एक तरफ यह आर्थिक अवसर देता है, वहीं दूसरी तरफ सामाजिक सवाल भी उठाता है।

    किताबों और रिपोर्ट्स में जिक्र

    इस विषय पर कई अध्ययन और किताबें भी लिखी गई हैं। एक किताब Thai Taboo: The Rise of Wife Rental in Modern Society में इस चलन को विस्तार से समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे यह व्यवस्था धीरे-धीरे बढ़कर एक अनौपचारिक सिस्टम बन गई है और पर्यटन संस्कृति का हिस्सा बन गई है। कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि यह अस्थायी संबंध आगे चलकर लंबे रिश्तों में बदल जाते हैं, लेकिन यह हर केस में जरूरी नहीं होता।

    भारत समेत दुनिया भर से आने वाले पर्यटक

    थाईलैंड में भारत समेत कई देशों से बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने आते हैं। यहां की संस्कृति, समुद्र तट और नाइटलाइफ उन्हें आकर्षित करती है। इसी वजह से यह देश एशिया के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। लेकिन रेंटल वाइफ जैसे ट्रेंड ने इसे और ज्यादा चर्चा में ला दिया है और यह अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बन चुका है।

    पर्यटन का नया चेहरा और बदलती सोच

    थाईलैंड का यह ट्रेंड दिखाता है कि कैसे पर्यटन किसी देश की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था को बदल सकता है। यह एक तरफ लोगों के लिए रोजगार का साधन है, तो दूसरी तरफ यह कई सवाल भी खड़े करता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह व्यवस्था किस दिशा में जाती है और क्या इसमें कोई बदलाव आता है या यह इसी तरह चलता रहता है।

    Aditi Rawat
    By Aditi Rawat

    अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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